माया

माया चक्र में फँस कर मनुष्य की बुद्धि, वास्तविकता देख नहीं पाती--तांडव ऋंखला का...

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पूजा में प्रेम

पूजा में मंत्रों से अधिक, आराध्य के लिये प्रेम होना चाहिए !

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अकारण तनाव

अकारण तनाव की अग्नि आनंद को भस्म कर देती है--तांडव ऋंखला का १२वाँ प्रकरण

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तांडव – 9

नमस्ते अस्तु भगवान विश्वेश्वराय महादेवाय त्र्यंबकाय त्रिपुरान्तकाय त्रिकाग्नी कालाय कालाग्नी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजयाय सर्वेश्वराय...

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तांडव – प्रकरण 5

नमस्ते नमस्ते विभो विश्र्वमूर्ते, नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते । नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य, नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्य...

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तांडव — प्रकरण 2

ऊँ महाकाल्यै च विद्महे, श्मशानवासिन्यै च धीमहि। तन्नो काली प्रचोदयात् ।।

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तांडव – प्रकरण 1

ॐ अरूणां करूणातरड्.गिताक्षिं धृतपाशाड्.कुशबाणचापहस्ताम् ।
अणिमादिभिरावृतां मयूखैरहमित्येव
विभावये भवानीम् ।।

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Blessings from Old Trees

Old Trees have a lot to give to young saplings, only if saplings knew...

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