एक शख्स है मेरे घर की तरह,
सर्दी की मीठी धूप की तरह।

 उसके साथ बैठने में राहत सी मिलती है

उसकी बातों से जीने की चाहत से मिलती हैं।

एक शख्स है दादा के पुरानी ऐनक की तरह

स्कूल जाते बच्चों के चेहरों पर रौनक की तरह

उसके ख्यालों में दुनिया का अलग नजरिया भी है

वह खुशी से मुझ को मिलाने का एक जरिया भी है

 एक शख्स है सितारों की तरह

पतझड़ के बाद वाली बहारों की तरह

अंधेरे में मुझको चमकना सिखाता है

कुछ काटे सा चुभें तो वो फूल बन जाता है।

एक शख्स है वादियों की तरह,

सोच की जंजीरों में कैद आजादीओ की तरह।

 मेरे सच को बुलंद कर देता है,

झूठ अगर जो मैं बोलूं तो नापसंद कर देता है।

 एक शख़्स है चाय की तरह,

मां के हाथों से बनी बुनाई की तरह।

जिंदगी के धागे कितने भी  बिखरे, अपने धागों से सिल देता है।

एक शख्स है किसी नई किताब की तरह,

रमजान के बाद वाले चांद की तरह,

पढू जब भी उसको उसमें से मेरी खुशबू आती है।

मेरी जरूरतों को अपनी दुआ बना लेता है,

है तो वह जमीनी पर फरिश्ते सा दिखाई देता है।

एक शख्स है जो मेरी आंखों में रहता है,

एक शख्स है जो मुझे मुंह जबानी है,

एक शख्स है जो दुनिया से अनजान है,

एक शख्स है जो मेरी कहानी है,

 वही एक शख्स है जो सिर्फ मेरा है,

उसे दोस्त कहूं या सबसे जिगरी दोस्त,

बस वही एक शख्स है जो सबसे प्यारा है।

खुश्बू🙈🙈

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Khushboo Purohit

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