मीना…. सदमे में थी इसीलिए वह डर कर कोने में जाकर बैठ जाती और अपनी खूबसूरत गोल हरी आंखों से सबको देखती रहती उसकी आंखों का रंग सबसे अलग और खूबसूरत है|

मीना ओ मीना 2
हम उसका डर दूर करने के लिए उसे घंटो गोद में रखते और खेलते रहते, 15-20 दिनों में प्रेम व दुलार पाकर वह पूर्णता सामान्य हो गई| नींद आने पर वह छोटे बच्चों की तरह गोद में आकर बैठ जाती ।वह शांत स्वभाव की बिल्लो रानी है|

मीना ओ मीना 3
अप्रैल में वह बहुत अजीब सा व्यवहार करने लगी , हमारे पैरों पर लोटपोट हो जाती और रोती रहती|कभी अपने पेट को दीवार में जोर-जोर से पटकती , कभी गोद में बैठ जाती और कभी बड़बड़ती हुई चली जाती ।हमने पशु चिकित्सक को दिखाया तो वह बोले कि यह आपके साथ खेल रही है जबकि ऐसा नहीं था गर्भपात होने के कारण वह बहुत अधिक पीड़ा में थी ।

मीना ओ मीना 4
जून महीने की सुबह वह बालकनी में बैठकर दूध रोटी खा रही थी ,अचानक कुछ गिरने की आवाज आई मैंने बाहर जाकर देखा अरररे …मेज के ऊपर एक चिड़िया थी ,और हमारी भोली मीना उसे मेज के शीशे के नीचे की ओर से पकड़ने की कोशिश कर रही थी,और विस्मित थी कि शिकार वहां होते हुए भी वह उसको पकड़ने में असमर्थ क्यो है?| मैने घायल चिड़िया को गोद में उठाया परंतु उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की ,कुछ देर बाद उसने आंखें टिमटिमायी तो ( घोंसला मेरे पास था) मैंने उसे घोसले में रख दिया तब भी उसने उड़ने की कोशिश नहीं की ,अब वह सुरक्षित महसूस कर रही थी| एक घंटे बाद सामान्य होने पर  फुररर्र से सामने वाले पेड़ पर जाकर बैठ गई।

मीना ओ मीना 5
मीना अपने शिकार को वहां ना देखकर अब भी नाराजगी और आश्चर्य के मिले-जुले भाव में थी । उसने अपना पसंदीदा भोजन भी नहीं खाया और बडबडाते हुए वही सो गई।
24 जुलाई गुरु पूर्णिमा को वह चार बच्चों की मम्मी बन गई| बच्चे प्यारे व स्वस्थ थे।

मीना ओ मीना 6
16 अगस्त की सुबह 10:30 बजे मैंने देखा कि वहाँ पर 3 बच्चे है जबकि 10:00 बजे चारो बच्चे वही थे।,बहुत ढूंढने के बाद शाम को 4:00 बजे नन्ही नीचे झाडियों में मिली ।मैंआश्चर्यचकित थी कि वह करीब 6 घंटे भूखी प्यासी अकेली वहाँ कैसे सुरक्षित रही।
22 अगस्त की सुबह सुश्री निष्ठा जी का फोन आया कि 3 बच्चों को किसी ने मार दिया है (नन्ही भी उन्ही में थी😢

मीना ओ मीना 7,मीना समझ नहीं सकी कि बच्चे क्यो नहीं उठ रहे हैं और बेचैनी से उनको उठाने का असफल प्रयास करती रही।), घायल बच्चा गमले के पीछे छिपा था उसको मैं ले आयी। ।उस अवस्था में उसका जीवित रहना मुश्किल था।क्योकि उसकी गर्दन में छेद हो जाने के कारण दूध पिलाने पर दूध बाहर निकल जाता ।
आश्चर्य है कि उसने आक्रमणकारी से स्वयं को किस बहादुरी और समझदारी से बचाया होगा।डॉ गीता जी के उपचार से अब वह स्वस्थ है और उन्होंने उसे नाम दिया टाइगर । 🦁

मीना ओ मीना 8
बच्चों की मृत्यु के बाद मीना बहुत व्याकुलता से बच्चों को ढूंढने के लिए कहती परन्तु अब हम दुःखी माँ को बच्चे कहाँ से ढूँढ कर देते?😟 और मासूम मीना को कैसे समझाते कि उसके अबोध बच्चो के साथ क्या हुआ है😢।

मीना ओ मीना 9
उस दिन से मीना आस पास ही रहती है और टाइगर को भी अकेला नहीं छोड़ती प्रत्येक जीव का दुख और भावनाएं एक समान होती हैं।यह हम को भी समझना होगा।
श्री हरि भगवान का बहुत बहुत धन्यवाद 🌹
उनकी कृपा ने ही मुझे मूक जीवों को समझने का अवसर दिया है।😍
अपनी पनाह में हमें रखना, सीखे हम नेक राह पर चलना।

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Karuna Om

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