मेरा जीवन ऐसा हो…तेरे दर्शन जैसा हो

आज यूं ही मैं बुझ रही थी
मेरा दर्पण कैसा हो
आज प्रभु मैं सोच रही थी
मेरा जीवन ऐसा हो…तेरे दर्शन जैसा हो

लोक हया सब काम संभाले
खुश हैं मात पिता घरवाले
दुनियादारी खूब निभाई
अब सब हैं तेरे हवाले

आज यूं ही मैं खोज रही थी
मेरा समर्पण कैसा हो
आज प्रभु मैं सोच रही थी
मेरा जीवन ऐसा हो… तेरे दर्शन जैसा हो

मन की वृत्ति, तन की काया
जानू इनको, है सब माया
माया ही से प्रीत लगाई
न कुछ मेरे हाथ में आया

आज यूं ही मैं जांच रही थी
मेरा वितरण कैसा हो
आज प्रभु मैं सोच रही थी
मेरा जीवन ऐसा हो…तेरे दर्शन जैसा हो

मार्ग दिखाओ मुझको दाता
उम्र समय सब गुजरा जाता
मुझ में है ना भक्ति भलाई
ना कुछ जप तप करना आता

आज खुद ही से पूछ रही थी
तेरा वंदन कैसा हो
आज प्रभु मैं सोच रही थी
मेरा जीवन ऐसा हो… तेरे दर्शन जैसा हो

मुझको अपना दास बना ले
आलौकिक से चेहरे वाले
तुझ से ऊंची न कोई बढ़ाई
जैसी भी हूं तू अपनाले

आज मैं थोड़ा जान रही थी
तुझसे बंधन कैसा हो
आज प्रभु मैं सोच रही थी
मेरा जीवन ऐसा हो…तेरे दर्शन जैसा हो

मेरा दर्पण कैसा हो…
मेरा समर्पण कैसा हो…
मेरा वितरण कैसा हो…
तेरा वंदन कैसा हो…
तुझसे बंधन कैसा हो…

आज प्रभु मैं सोच रही थी
मेरा जीवन ऐसा हो…

तेरे दर्शन जैसा हो…
तेरे दर्शन जैसा हो…

तेरे दर्शन जैसा हो…
तेरे दर्शन जैसा हो…

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Meena Arora

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