कितने जीवन मरण देखे मेने अपने २०० वर्षों में, कितना परिवर्तन देखा, लोगों का भाईचारा और झूठ का बोलबाला भी देखा। काश मैं बोल पाता, सात पीढियों का इतिहास बताता। मैं गांवों की चौपाल का पेड़। जहाँ मैंने कितनी पंचायतें देखी, सही फ़ैसले देखें, मेरी छाँव के नीचे लोग हँसते खेलते देखें, अब यहाँ कोई नहीं आता, सोच में डूबा हूँ कि वो दौर अच्छा था या ये दौर अच्छा है?जहाँ लोगों के पास अपनों के लिए समय नहीं। वो दौर था जहाँ एक थाली में सारा परिवार खाना खाता था, अब परिवार दो लोगों का ही रह गया। भाई और बहन के रिश्ते बस नाम के हो गए। हम दो हमारे दो भी जब तक के रिश्ते रहे जब तक कोई तीसरा ना आया। उसके बाद फिर वो ही दोहराया गया।मैंने डाकियों का आना देखा और अब उनका जाना भी देखा। सोना अनाज के भाव देखा और उसके लिए लोगों का स्वभाव भी देखा। गाँव में लाइट का आना देखा और अब लोगों को उसकी तरह यहाँ से जाना देखा। जहाँ झूठ के सहारे ज़िंदगी चलने लगी। अब मुझे भी काटा जा रहा है क्योंकि मै भी बूढ़ा हो गया हूँ!!उनके लोगों की तरह। काश मैं बोल पाता कितना कुछ है कहने को मैं समजा पाता।७ पीढ़ियों का इतिहास बताता।

English Translation:

I have seen how many lives, in my 200 years?I have seen so much change, I have seen the brotherhood of people and the dominance of lies. I wish I could speak, tell the history of seven generations. I am tree of Chaupal of villages. Where I saw so many panchayats, saw the correct decisions, saw people playing and laughing under my shade.Now no one comes here, I am immersed in thinking, is that was good or it is good? Where people do not have the support for their loved ones. That was the place where the whole family used to eat food in a plate, now the family remained of two people, and even the two are not sure of their relationship!! The relationship between brother and sister is just for name sake. After that, it was done again. I saw the arrival of postmen and now their departure too.Looked at the price of gold  equivalent to grain and also saw the nature of people for it.I saw the light coming in the village and now people are going with the speed of light from here. Where life started with the help of lies. Now I too being bitten because I too got old, like their people. I wish the tree could speak how much he was able to say. He would tell the history of generations.

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Manisha Nandal Dahiya

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