अनुभूति 1यह अत्यधिक चिंताजनक बात है की हम में से अधिकांश लोगों के साथ समस्या यह है कि हमें लगता की हम सब कुछ जानते हैं। मेरे साथ भी ऐसा कई बार हुआ।


जैसे ही मैं १८ साल का हुआ, मेरे जेहन में यह सोच आ गया कि मैं ही सब कुछ हूं, मैं हर चीज़ में सक्षम हूं, मुझसे सब शुरू और मुझ से ही सब खत्म होती है। मुझ से बड़ा मूर्ख और कोई नहीं था क्योंकि मैंने सीखना एक दम से बंद कर दिया था। अपने फूले हुए अहंकार के साथ, मैंने सोचा कि मैं हर विषय, हर संभव विषय से निपट सकता हूं। मैं दुखी, मायूस और चिड़चिड़ा सा रहता था क्योंकि मैं केवल भौतिक सुख  की खोज में था। मैं निराश था क्योंकि जब मुझे लगा कि मैं यह सब जानता हूं, तो एक दम से कोई जो मुझ से ज़्यादा ज्ञानी ऐसा कुछ कह देता जहां मुझे सबसे ज्यादा चोट पहुंचाता (मेरा अहंकार)। यहां तक ​​कि पानी, जो  शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, स्थिर होने पर अशुद्ध और दूषित हो जाता है। तो मैं क्या हूँ?

मुझे याद तो नहीं लेकिन एकदम से मुझे ओम स्वामी जी की पुस्तक “The ancient science of Mantras” मिली और मैंने उस का अध्ययन करना प्रारंभ कर दिया। पहले पन्ने ने मुझे झकझोर दिया, और मुझे तब पता चला कि मेरा अहंकार चकनाचूर हो गया। मैं पन्ने पलटा गया और अपने माथे के बीचों-बीच में एक छोटे से गर्म दबाव की तरह अजीब झुनझुनी महसूस कर रहा था। इससे पहले मैं कुछ भी पढ़ता था। बाजार में इतनी आध्यात्मिक पुस्तकों की बाढ़ आ गई है कि अभिभूत होना स्वाभाविक है। 

अब मैं सीखने के लिए सज्ज हूँ। धीरे-धीरे मैं विनम्र महसूस करने लगा। जब भी मैं एक परस्पर व्यंग्य से भरी हुई फेसबुक पोस्ट देखता हूँ और “यहाँ बॉस है जो आपके अहंकार को चकनाचूर कर देगा” वाली भावना आ रही है, तो मैं एक दम से रुक जाता हुँ, सोचता और इसे दूसरों पर बहस करने के लिए छोड़ देता। यदि ब्रह्मांड का कोई अंत नहीं है, वह अपार है, तो सब जानने वाला मैं कौन होता हूं? मुझे ज्ञात हो गया है कि मैं कभी भी सब कुछ और सब का ज्ञान नहीं पा सकूंगा, मैं बूढ़ा हो जाऊंगा और ज्ञान प्राप्त करने से पहले ही मर जाऊंगा। लेकिन मैं एक छात्र हूं और मैं कभी भी सीखना बंद नहीं करूंगा।


मेरा सबक? मैं जो कुछ भी आत्मसात् कर रहा हूं, बहुत बारीकी से विषयों का चयन कर रहा हूँ। अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनने से लगातार इनकार करते हुए मैंने उसे किसी तरह पीछे धकेल दिया था। मैं विश्वास करना सीख रहा हूं कि मैं ईश्वर का एक अंश हूं और अपने आंतरिक आवाज पर पुनः विश्वास कर रहा हूं। 

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Sandeep Sibs

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