आत्म परिष्कार का अर्थ क्या है? अर्थ सिधा सा है, तुम कदम रखो तो सुखै पडे रेगिस्तान में भी हरियाली उग आए, तुम कदम रखो और मायूस चेहरों पर मुस्कान छा जाएं, तुम कदम रखो और मुर्दों मै भी एक नई जान आ जाऐ।

बस  यही अर्थ है आत्म परिष्कार का।ना कि आत्म परिष्कार की अवस्था में आसमान से कोई सोने का विमान उतरेगा और तुम्हें उसमें बिठाकर ले जाएगा कहीं किसी स्वर्ग में।

आत्म परिष्कार यानी ऐसी  स्थिति जिसमें जीव तमाम प्रकार के हिंसक व्यवहारों का सर्वथा त्याग करें। सदैव के लिए। और संसार में रहते हुए भी उसके कर्म और व्यवहार जब किसी को लेश मात्र भी तकलीफ ना पहुंचाएं। तब समझना चाहिए कि बुद्धत्व की तरफ प्रयाण प्रारंभ हो चुका है। आत्म परिष्कार ना तो इतना सरल है और ना ही इतना जटिल है आवश्यकता बस इतनी सी है कि साधक ईश्वरीय चेतना के सत्य को स्वीकार करें। साधक स्वीकार करें कि ईश्वर कहीं बाहर नहीं उसके भीतर ही निवास करता है।

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Ravindra Vaishanav

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