हम कविता जी की दुआएं साथ लेकर आगे सहारनपुर की ओर बढे।कुछ अधूरे काम जो बहुत समय से रुके हुए थे ,पूरे करने थे। जो कि समय कम होने के कारण असंभव प्रतीत हो रहे थे।
    1घंटे में हमारे सारे काम  हो गए।अब हम निश्चिंत थे की शाम 6बजे तक हम आश्रम पहुंच जाएंगे,परंतु कुछ स्थानों पर यातायात बाधित होने के कारण  हमें सोलन पहुंचने में शाम के 6:00  बज गये। अंधेरा व ठंड भी बढ़ गयी थी।
     तभी…आगे वाला टायर पंचर हो गया । परंतु….टायर तो नये हैं, फिर ऐसा कैसे हुआ?अररररे याद आया कि सोलन से 2-3 किलोमीटर पहले एक बड़े गड्ढे से गाड़ी टकराई थी| शायद तभी…।
       श्री हरि भगवान का धन्यवाद कि यह हमे सोलन शहर में पहुंचकर पता चला। यदि वही पता चलता तो हमें मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता क्योकि उस सुनसान सड़क पर गाड़ी का ठीक होना कठिन था।
    कार में अत्यधिक सामान होने के कारण अतिरिक्त टायर नही निकाला जा सका। इसलिए मकैनिक से पचंर टायर को ही ठीक करने का आग्रह किया।उसने बताया कि गड्ढा गहरा होने के कारण नुकीले पत्थर ने टायर को काट दिया था।इसलिए टायर को ठीक होकर कार तक पहुँचने मे एक घंटे से अधिक समय लगा।
  साढ़े सात बज चुके थे।इसलिए भोजन के लिए कही रुकने का समय नहीं था।
    अब समस्या थी कि गिरिपुल से आश्रम की ओर जाने वाले छोटे  मार्ग पर भूस्खलन होने के कारण हमें पुराने कच्चे रास्ते से जाना था जिसमे समय अधिक लगने वाला था । लगभग आधा रास्ता निकल जाने के बाद  वही हुआ जिसका डर था।….
    वहां भी बरसात के कारण भूस्खलन  हो गया था।अब हम घबराहट  और डर के मिले-जुले भाव  के साथ आगे बढ़ रहे थे। परंतु कार ने धीरे-धीरे रेंगते हुए उस बाधा को पार कर लिया ।  भगवान की कृपा और किसी की दुआएं भी हमारे साथ चल रही थी। (मैं तो ऐसा ही मानती हूं ।)
      हम रात के लगभग 9 :30 बजे सुरक्षित आश्रम पहुंच गए।
          तेरा हाथ जिसने पकड़ा वो रहा न बेसहारा,
          दरिया में डूब कर भी उसे मिल गया किनारा।।
                  ।।श्री हरि भगवान की जय।।🙏🙏

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Karuna Om

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