आज अपने छोटे से अनुभव के आधार पर बता रहा हूं आश्रम , मठ, मंदिर इत्यादि के बारे में क्या न्यूज फैलाया जाता है और इसकी सच्चाई क्या है ।आध्यात्मिक सोच के कारण इन जगहों से मेरा गहरा सम्बन्ध रहा है।पहले भी जब छात्र जीवन में था और अब जब दो महीने से यात्रा पर हूं तो इस दौरान बहुत से आश्रमों में हमें रुकने का अवसर मिला। मै तर्क प्रधान सोच रखता हूं।कोरी भावना में बह जाना हमें पसंद नहीं।भारत एक विविधता वाला राष्ट्र है और विशेष रूप से सनातनी विचार वाले लोग यहां अधिक हैं।आश्रम ,मठ मंदिर निश्चित रूप से हमारे धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं।हमने अपनी आंखों से देखा है आश्रमों में कितनी स्वच्छता,पवित्रता,सत्यता,धर्म निष्ठा,ईश्वर भक्ति,किसी का भी सहयोग करने का पुनीत भाव,कोई भी आ जाए तो बिना किसी परिचय के उसे भोजन प्रदान करना,किसी भी तरह के व्यसन से मुक्त पावन स्थल।ये सब भारत के आश्रमों की वास्तविक छवि है।अगर हम कुछ अतिशयोक्ति पूर्वक बोल रहे हों तो कोई भी इन जगहों पर आकर वास्तविकता की जांच कर सकता है।
हमारे ॐ स्वामी जी जिनके वाणी को सुनकर इतना अध्यात्म लाभ हुआ वो भी तो किसी आश्रम के संचालक होंगे भले ही मै वहां नहीं गया हूं पर अनुभव के आधार पर चिंतन तो कर सकता हूं।फिल्मों में आश्रम को किस प्रकार से बदनाम किया जाता है और हमलोग उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट करवाते हैं।आपको पता होना चाहिए कि इस्कोन जैसी संस्था लाखों लोगों को रोज मुफ्त में भोजन और इलाज उपलब्ध करवाती है।रामकृष्ण मिशन जैसी संस्था मुफ्त में करोड़ों रोगियों को चाहे वो किसी भी मजहब या संप्रदाय का हो,बिना किसी भेद भाव के उसका इलाज या तो कम मूल्य पर या फ्री में करती है।ये सब आंखों देखी बात है।इस तरह के हजारों सनातनी संस्था हैं एक नहीं हजारों जो दिन रात समाज के हित देश के हित कार्य कर रही है। मै खुद भारत के दर्जनों ऐसे मंदिर जानता हूं जिनके दान के पैसे से अनेक मेडिकल कालेज,हॉस्पिटल्स,स्कुस्ल चलते हैं और वहां इन चीजों की मुफ्त में सेवा दी जाती है। गायत्री परिवार ,तिरुपति बालाजी,संघ परिवार इत्यादि एक नहीं सैकड़ों सैकड़ों बड़ी संस्थाएं हैं जो निर्बाध रूप से बिना स्वार्थ बिना भेद भाव के दिन रात समाज व देश के जरूरत मंद लोगो तक अपनी सेवा पहुंचा रहे।जब भी देश में कहीं आपातकालीन स्थिति या कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो इन संस्थाओं के कार्यकर्ता धन, तन मन सबसे अपना सहयोग करते हैं यहां तक कि अपना ब्लड भी डोनेट करते हैं।यहां समाज हित के अलावा योग ,आयुर्वेद,जीवन जीने की कला,और विशुद्ध भारतीय अध्यात्म की शिक्षा दी जाती है।ये है आश्रमों,मठों,मन्दिरों का सच जो न तो कभी प्रिंट मीडिया न कोई इलेक्ट्रॉनिक मीडिया न ही फिल्मों में दिखाई जाती है।
मैं भी इसी देश का नागरिक हूं।हम जानते हैं कि आश्रम या सिखों के लंगर के अलावा शायद ही किसी मस्जिद या चर्च से इस तरह की महान सेवा की जाती हो वो भी अनवरत रूप से।एक बाइबल देकर और कुछ रुपए देकर बदले में कन्वर्ट कर देता है और क्रिश्चयन बना लेता है।दूसरा जकात के पैसे से देश विरोधी हरकतों में और जिहाद के काम में धन लगाता है। हमें भी सच पता है कि जो बुरे हैं उनकी बुराई दिखाने की हिम्मत नहीं होती और जो सही हैं उनकी सच्चाई छुपा कर इन सनातनी संस्थाओं को बदनाम किया जाता है।बस आवश्यकता है हम अपने वास्तविक जीवन मूल्यों को पहचानें और उसका सम्मान करें। धार्यते इति धर्म:।अर्थात जो धारण करने योग्य है वही धर्म है।इसलिए मेरे विचार से अपने धर्म को आप जान लो तो कहना नहीं पड़ेगा कि इसे मानो,,,,आप इसकी सच्चाई देखकर और इसकी विशुद्ध वैज्ञानिक अध्यात्म शैली को देखकर गर्व और प्रसन्नता से भर उठोगे।आज इतना ही …..श्री राधे श्याम 🌹🌹🌻🌻✨✨🌳🌳🌴🌴🙏

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Ashu Harivanshi

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