इन आंखों को अभी भी उसकी तलाश है

मेरा दिल थोड़ा जिसने बीच राह में छोड़ा जिसने इन आंखों को अभी भी उसके लोट आने की आश है
इन आंखों..……

वो न कभी मेरा था न कभी होगा पता नहीं ये कैसी प्यास है इन आंखों अभी भी उसकी तलाश है

उसके साथ हर पल खूबसूरत था उसके बिना हर लम्हा चुभता है उसने सारी यादें भुला दी तो क्या,उसका हर एहसास मेरे पास है
इन आंखों को……….

झूठी सारी कसमे झूठे सारे वादे
इश्क भी क्या चीज है मालूम है कि वह वेवफा है फिर भी वह मेरे लिए खास है

इन आंखों को अभी भी उसकी तलाश है………

कुछ इस कदर बेवफाई की है उसने फिर भी इस दिल को सिर्फ उसी की चाहत है 

इन आंखों को अभी भी उसकी तलाश है………

बारिश की बूंदों का गिरना उसे देखकर मेरी सांसों का उमड़ना हर ख्वाहिश में बस उसी की चाहत है

इन आंखों को अभी उसकी तलाश है………..

श्री राधे

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Vikram Singh Parihar

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