ओंकार स्वरुपा, सद्‍गुरु समर्था
अनाथाच्या नाथा, तुज नमो
तुज नमो, तुज नमो, तुज नमो

नमो मायबापा, गुरुकृपाघना
तोडी या बंधना मायामोहा
मोहोजाळ माझे कोण नीरशील
तुजविण दयाळा सद्‍गुरुराया

सद्‍गुरुराया माझा आनंदसागर
त्रैलोक्या आधार गुरुराव
गुरुराव स्वामी असे स्वयंप्रकाश
ज्या पुढे उदास चंद्र रवी
रवी, शशी, अग्नि, नेणती ज्या रुपा
स्वप्रकाशरुपा नेणे वेद

एका जनार्दनी, गुरुपरब्रम्ह
तयाचे पै नाम सदा मुखी
तुज नमो, तुज नमो तुज नमो

– संत एकनाथ महाराज

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प्रणाम प्रिय स्वामीजी 🙇🙏 ,

संत एकनाथ महाराज जीं ने लिखी यह गुरु स्तुती गाते समय मुझे आप का हि स्वरूप आखों के सामने आता है । आप ओंकार स्वरुप, सद्‍गुरु समर्थ है । अनाथों के नाथ है । आपको मेरा बारंबार नमन है 🙏

हे हमारे मायबाप , कृपालू गुरूवर्य हम जिस संसार बंधन में उलझे है , जिस मोहमाया में फंस गए है , उससे आप हि हमें बाहर निकाल सकते है । आप के सिवा हमारी मोहजाल से कौन मुक्ती कर सकता है ?

मेरे सद्गुरू आनंद सागर है । त्रैलोक्य का आप हि आधार है । गुरूदेव स्वतः स्वयं प्रकाशित है जिनके आगे चंद्र , सूर्य भी फिके है । मेरे गुरूदेव के तेज से हि रवी, शशी, अग्नि ,वेद आदि उजागर है ।

गुरू परब्रह्म है । उनका नाम सदा स्मरण में रहे । स्वामीजी आपको मेरा बारंबार नमन है 🙏

Audio
https://youtu.be/krLkLormwI4

All glories to you my lord 🙇🙇🙇🙇🙇 

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Amruta

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