एक शाम डॉ गीता जी का संदेश आया कि प्रथम तल के स्टोर से बिल्ली के रोने की आवाज आ रही है| स्टोर का ताला खोलने के बाद वहां कोई बिल्ली नजर नहीं आई| परंतु बिल्ली की आवाज और स्पष्ट सुनाई देने लगी| कुछ लोगों ने बताया कि आवाज 2 दिन से आ रही है| आधा घंटे बाद बोध हुआ कि आवाज स्टोर के अंदर से नहीं स्टोर की दीवार के पीछे से आ रही है स्टोर के बराबर में एक कमरा होने के कारण उस आवाज तक पहुंचने का कोई मार्ग नहीं सूझ रहा था|
स्टोर की दीवार एलमुनियम के चौकोर टुकड़ों से बनी थी इसलिए सर्वसम्मति से निर्णय लेकर दीवार का एक टुकड़ा निकाला तो हम सब चौक गए……ओह यह क्या है ?😮 क्योंकि वहां पर 6 इंच चौड़ी एक संकरी अंधेरी गली थी| बच्चे को वहां से निकालना किसी के लिए भी संभव नहीं था इसलिए बच्चे की मां स्वीटी को लाया गया| परंतु स्वीटी समझ नहीं पाई कि क्या हो रहा है और वह घबराकर अर्थ चेतन अवस्था में फर्श पर गिर गई| बच्चा बहुत अधिक डर जाने के कारण अपनी पसंद का भोजन देखकर भी बाहर नहीं आ रहा था| सब प्रयास असफल होने के बाद एक ही विकल्प रह गया था की स्वीटी की बेटी प्रीति को लाया जाए| अपनी बहन को देखकर वह बच्चा धीरे-धीरे बाहर आने लगा सुश्री दिया जी ने प्रीति को बहुत धैर्य और प्रेम से तब तक पकड़ा रखा जब तक वह बच्चा बाहर नहीं आ गया|
हम सब ने राहत की सांस ली और श्री हरि भगवान को बहुत धन्यवाद दिया हम सब विस्मित है कि छत से गिरने के बाद भी वह पूर्ण रूप से स्वस्थ था| इसलिए उसको नाम दिया गया लक्की| सच ही कहते हैं जाके राखो साइयां मार सके ना कोय|अमित जी और अजीत जी को बहुत-बहुत धन्यवाद क्योंकि उनकी सहायता के बिना लक्की को वहां से निकालना असंभव था|दिव्या जी को विशेष आभार क्योंकि उन्होंने ही मुझे लक्की की कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया| मैंने पहली बार लिखने का प्रयास किया है इसलिए त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थी हूं जय श्री हरि|🌷

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Karuna Om

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