तूफ़ान से पहले के सन्नाटे को तो सभी जानते हैं पर,

तूफ़ान के बाद क्या होता है क्यों ये कोई बयान नहीं करता!

वो तेज़ हवाओं का धीरे से थम जाना,
वो उड़ती हुई धूल का मिट्टी में रम जाना,
वो पक्षियों का फिर से चहचहाना और,
वो ज़िन्दगी का फिर से चल पड़ना!!

हाँ, माना सब बिखर गया पर  ‘है तो सही’ ,
समेट लेंगे!
आख़िर यही तो ज़िंदगी का फ़लसफ़ा है!

ये उधेढ़बुन ये मिलना बिछड़ना,
खुद को सम्भालना और फिर
टूट जाने देना,
ये सब ना हों तो ज़िंदगी बेरंग ही तो है !

इस बिखरने सँवरने, बिछड़ने मिलने में  ;
हम ‘ज़िंदा’ रहें ये ज़रूरी है!!

और उम्मीद….. वो बनी रहनी चाहिए…

A gentle reminder to all of us to stay mindful i.e.  ‘ज़िंदा’ while we live each and every moment of our lives despite how difficult the situations might be, one thing worth holding onto is ‘hope.’ One can get through the biggest adversities only if we can be hopeful in those testing times and that is why ‘ummeed to bani rehni chahiye’. Love and light to all!!!

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parul

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