कुंडली एक प्रकार की रचना है, जिसके माध्यम से हम हमारे कर्मो व उसके प्रभावों का अध्ययन करते है. कुंडली सिर्फ माध्यम है, व्यक्ति को सही ज्योतिष का ज्ञान होना चाहिए जिसके माध्यम से वह फलकथन व मार्गदर्शन कर सकें.

इसके प्रमुख भाग है

1. बारह भाव, 2. बारह राशि, 3. सत्ताइस नक्षत्र 4. 7 प्रमुख ग्रह 5. राहु व केतु 6. नवीन ग्रह उरेनस, नेपच्यून, प्लूटो 7. अंश कला विकला माप माध्यम 8. दृष्टि 9. युति 10. कुंडली के अन्य बिन्दु

कुंडली के प्रकार

वर्गाकार कुंडली (दक्षिण भारतीय)
त्रिकोण कुंडली (उत्तर भारतीय)
वृत्ताकार कुंडली (पश्चिमी)
अन्य जिसमे बंगाली, राजस्थानी, कश्मीरी आदि कई अन्य प्रकार कम मात्रा में स्थानीय मूल के लोगो द्वारा उपयोग किये जाते है.
अन्य तत्व

कुछ अन्य तत्व जो भारतीय ज्योतिष में उपयोग किये जाते है, हालाँकि इसकी गणना कुंडली से ही होती है, लेकिन यह कुंडली से अलग तत्व है.

वर्ग कुंडली
दशा जिसमे अलग अलग प्रकार की दशाएं होती है, सर्वाधिक विमशोत्तरी दशा प्रचलित है
गोचर कुंडली
चलित कुंडली
पंचांग / मुहूर्त
सुदर्शन चक्र कुंडली (सूर्य कुंडली, चन्द्र कुंडली, लग्न कुंडली)
अन्य तत्व जिसमे अष्टक वर्ग, षड्बल जैसे कई तत्व है
ज्योतिष के व्यवस्थित शिक्षा के लिए सही तरह से मार्गदर्शन व शिक्षा होना चाहिए. सामान्यतः बेसिक व फलकथन दोनों ज्योतिष सीखने के लिए 6 माह पर्याप्त है. इसके अतिरिक विश्लेषण व कार्य अनुभव के अनुसार आप अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकते है.

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