• स्वप्न या असलियत
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  • कल रात स्वप्न में मेरे एक सुहानी सी तितली आई….
  • हवा में पंख लहराती मानो वो खुशी की नई उमंगें लाई….
  • दूर से उसे देख मन ही मन में मैंने थे कई ख्वाब
    सजाए…
  • लेकिन पलक झपकते ही वो तितली हो गई अदृश्य…
  • जैसे ही मैंने उसकी और थे हाथ बढ़ाये….
    ऐसा लगा मानो खुशियां चोखट पे आकर लौट गई….
  • इससे पहले कि मैं “स्वप्न और असलियत” में अंतर जान पाती…. मैं गहरी नींद में सो. गयी………)
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  • *–शिवानी-
  • कुछ दिल के भाव कागज़ पर उतारे हुए... 1

भाग्य

भाग्य भरोसे मत रहिए
बिना किए कोई कर्म..
फल की अभिलाषा मत रखिए..
भाग्य का ऐसा खेल है कि..
आज राजा तो कल नौकर भी बना सकता है…
किसने देखा है भविष्य को,
यह पल में सबक सिखा सकता है..
याद रखें कर्म ही है असली जीवन धन..
कर्म के भरोसे जो रहोगे,
कभी ना धोखा खाओगे तुम…

कुछ दिल के भाव कागज़ पर उतारे हुए... 2

 

एक सच्ची प्रार्थना

सृष्टि के रचनहार ही मुझे कोई राह दिखाए…
सहारा देने मुझे खुद ही चलें आए..
या करे कुछ ऐसा जिस से मेरी जिंदगी संवर जाए
मुशकिलें दी है अगर किसमत में, तो लड़ने की हिममत भी बढाए..
बीत गया सो बीत गया, अब आगे बढ़ना भी जो सीखाऐ..
रिशते तो बना दिऐ अब उनहें निबाहना भी ती आए..
इनसान बना कर छोड़ दिया ,पर करम कया करना है, कौन
समझाए??
बांट दिया है तुमहे कयी नामों में,
कौनसा है सच, अब कैसे जान पाएँ..
कया पहुंच जाती होगी ,हमारी आवाज़ तुम तक..
अकसर हम इसी सवाल में ही उलझ जाएँ..
जिंदगी की उलझी हुई पहेली को,अब कौन सुलझाए..

हे प्रभु ,अब तो मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि दिखाएँ..
मुशकिलों में मेरा हाथ पकड़ कर सार्थ निभाएँ..
रहमत करो मुझ पर ऐसी किं ,मेरे सारे दुख दूर हो जाएँ..
बस इतनी कृपा करो हे करुना नीधान, कि मैरा यह जनम
सारथक हो जाए…
यह जनम सारथक हो जाए….

कुछ दिल के भाव कागज़ पर उतारे हुए... 3

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Gorvi Sharma

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