मृत्यु तुम कैसी हो?

तुम हो शाश्वत सत्य ये सच है..,

लेकिन कैसा है तुम्हारा रूप?

वीभत्स या सौंदर्य में पगा?,

कैसा है तुम्हारा स्पर्श?

माँ की गोद सा स्नेहसिक्त …,

या प्रेमी के प्रथम चुम्बन सा मादक?

कैसा है तुम्हारा स्वर?

क्या तुम केवल क्रंदन हो?

या हो उन्मुक्त हास्य?

बाँसुरी की मीठी तान हो..,

या अनसुना कोई ज्ञान हो?

अच्छा इतना कहो…,

क्या सचमुच तुम जीवन  पर

एक पूर्ण विराम हो???😊😊

सुनीता. 18.12.2021

Ignore my Flaws! 💐💐🙏🙏

मुझे कविताएं लिखने का बहुत शौक है…लिखती थी और सबको सुनाती थी…अधिकतर प्रेम की कविताएं… हम दोनो को पसंद थी, शायरी, कविताओं, ग़ज़ल…उनकी पसंददीदा ग़ज़ल थी ” कौन कहता है मोहब्बत के ज़ुबाँ होती है..,

 ये हक़ीक़त तो निग़ाहों से  बयाँ होती है…!”

मुझसे कहते थे कि केवल प्रेम गीत ही मत लिखो…कुछ ज़िन्दगी की सच्चाई भी सीखो… मुझे  लगता था कि वो साथ हैं तो किस बात की फ़िक्र?

कभी कभी कई दिनों तक न मिल पाने पर मुझसे बोलते थे कि नाराज़ हो.. तो मैं बोलती कि “अपनी ये छोटी सी मुलाकात बहुत है… जितनी देर तेरा मिले साथ बहुत है…!”

There are loads of memories…I may have submerged in them  and never be out of it…All are so beautiful…..!!!!

Today somehow I have written an unusual one…I don’t know why…!

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Suneeta Singh

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