जब मैं पहली बार प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के उद्देश्य से पटना आया तो एक लॉज में आकर रुका। मेरी एक आदत है हमेशा से कि समय को बर्बाद नहीं करना है ।इसलिए मैं हमेशा एकांत को पसंद करता हूं ताकि कोई मुझसे ज्यादा बात ना करें और मैं अपने काम को बहुत ही तन्मयता के साथ कर सकूं ।उस समय मेरे ऊपर पढ़ाई का ऐसा धुन सवार था की 24 घंटे में मात्र साढ़े 4 घंटे सो पाता था। बाकी समय पागलों की तरह पढ़ता था ।यहां तक कि बाथरूम में भी जनरल नॉलेज की ऑडियो रिकॉर्ड करके सुना करता था खाना खाते वक्त भी याद किया करता था और जब 6 किलोमीटर की दौड़ लगाता था उस समय भी अपनी रिकॉर्ड की हुई ऑडियो सुनता था ताकि उसके लिए मुझे अलग से समय ना देना पड़े।

         जैसे ही मैं शाम को पढ़ाई करके अपने रूम पर आता उसके बाद झट से थोड़ा नाश्ता करके मैं छत पर चला जाता और सब से एकांत एक कमरा था उस कमरे के बगल में छत पर ही बैठ कर पढ़ाई करना शुरू कर देता। लगातार 10:00 बजे तक पढता और अ वह ऐसा कमरा था जिसके बारे में अक्सर हमने सुन रखा था कि उस कमरे में कोई टिकता नहीं है। मुझे समझ आ गया था कि कोई इसमें टिकता क्यों नहीं होगा ,1 दिन में दोपहर के समय उस कमरे में प्रवेश किया एक अजीब सा खौफनाक सूनापन उस कमरे में छाया हुआ था। पता नहीं उस कमरे की क्या कहानी थी मैं नहीं जानता। एक रात्रि के समय मैं वहां बैठ कर पढ़ रहा था और कमरे के अंदर से कुछ पटकने की आवाज आने लगी। मैंने कुछ देर सोचा कि हो सकता है कोई बिल्ली होगी जो चूहे को पकड़ने की कोशिश कर रही हो ।अभी मेरा दिमाग तो बहुत तार्किक है किसी भी चीज पर विश्वास करने से पहले सौ बार सोचता हूं फिर मैंने चारों तरफ देखा कि वह कमरा इतनी अच्छी तरह से पैक था की एक छिपकली भी उसमें बड़ी मुश्किल से घुस पाती फिर बिल्ली के घुसने का कोई चांस ही नहीं था। मैं कभी उस कमरे के बिल्कुल नीचे अपने कमरे में प्रवेश करता तो  उसके ऊपरवाले एकांत कमरे से धम धम की आवाज सुनाई पड़ती ।ऐसा लगता जैसे ऊपर कोई उछल कूद मचा रहा हो । जैसे ही वहां से निकल कर फिर संदिग्ध कमरे के पास आता तो वह अजीबोगरीब  आवाज गायब हो जाती।  मैंने अपने कितने दोस्तों को यह अजीबोगरीब आवाज सुनाई  थी ।सबने अलग-अलग तरह की कहानियां बता दी। कभी-कभी मैं उस आवाज के तेज हो जाने पर सोया हुआ होने के बावजूद जग जाता और पक्का विश्वास हो जाता कि उस कमरे में कुछ अजीबोगरीब घटनाएं अवश्य हुआ करती हैं।

        आज रक्षाबंधन का दिन था। लॉज के लगभग सभी लड़के अपने घर जा चुके थे ।बस मैं और आशीष उस विशाल लॉज में बचा था ।और उस  संदिग्ध कमरे के जस्ट नीचे हम दोनों का रूम था। मैंने आशीष को पहले सचेत कर रखा था की ऊपर वाले एकांत कमरे से इस तरह की अजीबोगरीब आवाज आया करती है ।वह लड़का थोड़ा लापरवाह था और शराब पीकर रात के 4:00 बजे तक मोबाइल पर फिल्में देखा करता था ।पर मेरी तो एक नियमित दिनचर्या थी मैं 11:00 बजे तक सो जाया करता था और सुबह 4:00 बजे तक जग जाया करता था। जब मैं जगता था तो आशीष सोने की प्रयत्न कर रहा होता था और बेचारा दिन के 2:00 बजे तक सोया रहता था और मुझे पता है उसका स्वास्थ्य कितना बदतर हो गया था। आज भी मैं 11:00 बजे सोया और लगभग 2:00 बजे आशीष दौड़ते हुए मेरे रूम में आया उसने कहा आशु भैया जल्दी उठो आशु भैया जल्दी उठो देखो कैसी आवाज आ रही है। मैंने कहा आशीष को कहा की ऐसी आवाजें तो मैंने इस रूम में कई बार सुनी है। वास्तव में उस दिन आवाज बहुत ही भयावहता के साथ आ रही थी और बहुत जोर जोर से आ रही थी हमें पता था कि उस छत पर एक परिंदा भी नहीं है और कमरे में तो किसी के होने की संभावना ही नहीं है फिर कमरे से इतनी भयानक आवाज कैसे आ सकती है। उसने बोला अब क्या करोगे हम दो ही लड़के हैं। फिर हम दोनों ने युवा जोश के कारण सोचा कि उस कमरे तक चला जाए जहां से आवाज आ रही है। हम दोनों पूरे जोशीले थे ।हम दोनों ने एक एक रॉड लिया लोहे का और चिल्लाते हुए उस कमरे की ओर बढ़े जिधर से रोज ही अजीबोगरीब आवाजे आया करती थी। हमें पूरा पता था कि उस कमरे में कुछ अवश्य है भले ही आज तक देखा नहीं था लेकिन उसका आभास अच्छी तरह से हो गया था। हम वहां जाकर कमरे की खिड़की और गेट पर बाहर से ही कई सारे रॉड का प्रहार किए और लगभग गाली देते हुए भी कहा ,”अगर है तुम्हारी ताकत है तो बाहर निकल ,चुपके से क्यों डराता है ।मैं तेरे सामने खड़ा हूं अगर  हिम्मत हो तो लड़ ले”। जैसा आशीष था वैसा ही लगभग मैं भी था। हम दोनों ने उसे बहुत गालियां भी दी और दरवाजे पर रॉड लेकर खड़ा रहा….. तू बाहर निकल आज देख लेता हूं तेरे में कितनी ताकत है ।पर अफसोस नीचे से जितनी जोर जोर की आवाज सुनाई पड़ रही थी अब वह आवाज बिल्कुल शांत हो चुकी थी लग ही नहीं रहा था कि इस कमरे में कोई अभी-अभी घटना घटी है। मैंने सुन रखा था कि आप जितना डरते हो उतना ही परिस्थितियां आप पर हावी होती हैं और हम दोनों थे ही कुछ इस तरह निडर कि उससे लड़ने के लिए बार-बार बेताब हुए जा रहे थे ।भले ही हमारी मूर्खता रही हो पर एक हद तक वह साहस का होना  सही है ।अगर आप साहसी नहीं है ,अगर आपकी जीवनी शक्ति कमजोर है अगर आपके शरीर की आंतरिक ऊर्जा सकारात्मक नहीं है अगर आपके शरीर की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षमता मजबूत नहीं है तो कोई भी नकारात्मक शक्तियां आपके ऊपर तीव्रता से हावी हो सकती हैं। जिन की जीवनी शक्ति कमजोर होती है उन्हें ही तरह-तरह की बीमारियां परेशान करती है उन्हें ही तरह तरह की परिस्थितियां भी परेशान करती है और जिस का मनोबल मजबूत होता है वह शायद ही कभी घबराता होगा। ईश्वर की दया से मेरे में यह सब गुण पहले से मौजूद है। उस घटना के बाद मैं बहुत दिन तक वहां रहा उस तरह की कोई आवाज फिर हमें सुनाई नही पडी। पता नहीं इस घटना के पीछे का क्या सच है। मैंने यह घटना अपने पापा को सुनाई फोन करके तो उन्होंने कहा जल्दी से वह कमरा छोड़कर चले जाओ। मैं कहां मानने वाला था उनकी बात। मैं तो हमेशा सामना करने में विश्वास रखता हूं भागने में नहीं। अब मुझे कुछ दिखाई तो नहीं पड़ा लेकिन अनुभव स्पष्ट हुआ था।  os.me के इस प्लेटफार्म पर इस मामले के एक से एक विशेषज्ञ है अब वही बताएंगे कि क्या सही था क्या गलत था ।हमने तो जितना अनुभव किया उतना लिख दिया आपको कैसा लगा कमेंट अवश्य करना। उसी जगह की एक और घटना है उसे बाद में पोस्ट करूंगा।जय श्री हरि

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Ashu Harivanshi

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