राधे श्याम
प्यारे दोस्तों आज आपसे वार्ता करनी है कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक स्वरूप क्या है।साथ ही एक सशक्त महिला का परिचय देना है जिनकी तस्वीर ऊपर लगी हुई है। ये महान महिला हैं कर्नाटक की जन्मभूमि से हिमालय के उत्तुंग शिखर पर नौ साल तपस्या करने वाली संत सुभद्रा माता जिनका फ़रवरी माह में शरीर पूरा हुआ।
कर्नाटक के उडुपी में माताजी का अवतरण हुआ और समय के साथ जब माताजी के हृदय में वैराग्य का जागरण हुआ तो गोमुख ग्लेशियर से भी आगे तपोवन में जहां माइनस चालीस डिग्री तक ठंड चली जाती है उस दुर्गम जगह पर रहकर नौ वर्ष तक साधना की।ऐसा साहस दिखा पाना किसी पुरुष साधक के लिए भी दुष्कर बन पड़ता है।इसे कहते हैं सशक्त महिला जिसने अपने क्रिया और कर्म के माध्यम से बताया कि धर्म के लिए जीना और खुद को सशक्त करना किसे कहते हैं।आपने इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई,रानी चेनम्मा, मां पद्मावती,महारानी दुर्गावती जैसी स्त्रियों के बारे में पढ़ा होगा,जिन्होंने सैकड़ों कष्ट सहे लेकिन धर्म का साथ न छोड़ा आज भी पी टी उषा,कमांडो ट्रेनर सीमा जी,हिमा दास,इत्यादि बहुत सी स्त्रियां हैं को महला सशक्तिकरण का वास्तविक स्वरूप प्रदर्शित करती हैं।
अब जरा बात करते हैं आज की कुछ नासमझ स्त्रियों की को बॉलीवुड की अर्धनग्न स्त्रियों की लाइफ स्टाइल को कॉपी करना ही female enforcement समझती हैं।उनके जीवन में कोई धर्म नहीं,कोई अध्यात्म नहीं,कोई शौर्य का भाव नहीं,जीवन को को सार्थक करने का कोई सही नजरिया नहीं बस आधुनिकता की आड़ में धर्म विमुख होकर जीवन जीना और इसी मूर्खता को अपना शान समझना इसी में जीवन समाप्त हो जा रहा है।इन्हे कौन समझाए कि आपकी वो अर्धनग्न जीवन शैली सभ्यता की निशानी नहीं है,वो आपकी लाइफ स्टाइल नहीं बल्कि ऑनस्क्रीन कॉपी की हुई लाइफ स्टाइल है।बस अंत में नहीं निवेदन करना है कि भारत या अन्य देशों की स्त्रियों को आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को समझते हुए जीवन सार्थक करना चाहिए न कि दूसरो की जीवन शैली कॉपी कर के। समय रहते भारत की स्त्रियों को अपने सभ्यता और संस्कृति का सम्मान करना होगा वरना वो दिन दूर नहीं जब सनातन संस्कृति इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगी।राधे श्याम

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Ashu Harivanshi

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