हे गोपी जी आप महान हैं। हमारा नमन कृपया स्वीकार करें।

भगवान जी के विरह में भी आपने अपने प्रेम की मिठास बरकरार रखी।
साधारण रिश्ते में भी कोई इन्सान अगर थोड़ी देर बाद दूर हो जाए तो इतनी तकलीफ होती है, आपकी आखों से तो भगवान ओझल हो गए थे, दूर चले गये थे , आपको क्या महसूस हुआ होगा इसकी तो कल्पना मात्र से दिल पसीज जाता है।
जिनके लिए आप सबकुछ दाव पर लगाने को तैयार हों, जिनके विचारों से आपकी सुबह हो, पूरे दिन में हर काम उनके चिंतन के साथ गुजरे ऑर रात में उन्हें याद करना आपकी जरूरत बन जाए। आपके जीवन का आधार वो बन जाएँ। अगर वो ही दूर चले जाएँ तो आपको तो एसा लगा होगा ना जैसे बस शरीर बचा है, आत्मा तो उन्हीं के साथ चली गई।
आपने फिर भी कोई प्रश्न नहीं किया ना कोई शिकायत की। आपने अपने प्रेम में कोई कड़वाहट नहीं आने दी अपितु कृष्ण भाव में ऐसे रमे कि इतने ज्ञनवान उद्धव जी को भी प्रेममयी कर दिया।

माॅ अगर आपको हम लायक लगें तो कृपया आशीर्वाद दीजिएगा कि आपके जैसे हम भी रम पाएं अपने इष्ट के प्रेम में।

आपके चरणों में कोटिशः नमन