घड़ो प्रभु , घड़ो प्रभु इस घड़े को पूरा घड़ो प्रभु

माटी तुम्हरी, जल भी तुम्हारा
अगन तुम्ही और तुम्ही कुम्हारा
दुःख का भेज अम्बार, इसको घड़ो प्रभु….

माटी को जब छानन लागो
तिनका तिनका ऐसे भांजो
कांकर रह न जाए , इसको घड़ो प्रभु…..

माटी को जब गूंथन लागो
मसलो, चिरथो, ऐसे दाबो 
कण कण दियो भिजाए, इसको घड़ो प्रभु….

जब चरखी पे इसे चढ़ावो
दुःख सुःख का यों नाच नचावो
तन मन सब सध जाए, इसको घड़ो प्रभु….

घूमन लागे जब ये माटी
ठोकर ऐसी मारो याकी
हर कोना बन जाए, इसको घड़ो प्रभु….

तपने को जब इसे चढ़ावो
ऐसी ऊँची लपट लगाओ 
देवो घना जलाए, इसको घड़ो प्रभु…..

छानो, गूँथो, अति घुमाओ
घना जलाओ, घना तपाओ
पूर्ण दियो बनाये, इसको घड़ो प्रभु…..

घड़ो प्रभु, घड़ो प्रभु  इस घड़े को पूरा घड़ो प्रभु

जय श्री हरि

 

Sometimes, the very difficulties one faces, become the stairs to climb and reach home.

 

Such an individual journey, which generally is beyond word power, surely results into great wisdom. Experiencing is way above narrating it.

 

🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️

 

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