आज मैं आप सब से अपना दु:ख साझा करना चाहती हूं|| अभी सुबह के 11:30 बजे हैं और मैं गौशाला में कपिला मम्मा की विदाई का ह्रदय विदारक दृश्य देख कर आई हूं मैं उनको प्यार से मम्मा कहकर पुकारती थी ,जब हम गौशाला में गौमाताओं को सब्जियां खिलाने जाते और “हरे कृष्णा” बोलते तो वह भी उठकर खड़ी हो जाती और अपनी खूबसूरत छोटी-छोटी कजरारी आंखों से हमें देखती| वह गौशाला की लाल गांयो में सबसे सुंदर थी, उनका शरीर हष्ट पुष्ट और त्वचा बहुत ही चमकदार थी वह थोड़ी नटखट थी इसलिए अपने बहुत निकट आने की अनुमति कभी-कभी ही देती थी|
28 सितंबर को उनके पेट में दर्द हुआ तो पशु चिकित्सक से पूछ कर दवाई पिला दी गई ,परंतु अगले दिन भी वह दर्द में थी और कुछ नहीं खा रही थी| डाक्टर ने स्वयं उनको कुछ दवाइयां और इंजेक्शन दिए परंतु कुछ लाभ नहीं हुआ ऐसे ही 5 दिन बीत गए| (डॉक्टर प्रतिदिन अपना कार्य बहुत प्रेम और इमानदारी से कर रहे थे )चतुर कपिला मम्मा 2

हमने मम्मा की पसंद के केले और तरबूज सोलन से मंगाए परंतु वह देख कर मुंह फेर लेती ,ऐसा लगता था जैसे उनकी कुछ भी खाने की इच्छा पूर्णतः समाप्त हो गई है ।
वह इतनी कमजोर हो गई थी कि मैं और पदम जी (आश्रम के सेवादार) जबरदस्ती उनका मुंह खोलकर फल के टुकड़े रखते तो वह बाहर निकाल देती। जब मैं मम्मा के माथे को हाथ से सहलाती तो वह असहाय अवस्था में बैठीै मुझे देखती रहती।😣 ,वह दृश्य किसी को भी रूला सकता था। हमें नहीं पता था कि मम्मा को फल खिलाने का यह हमारा अंतिम प्रयास है(असफल)।वैसे तो 6 दिन से उनको खारा पानी ( saline )भी चढाया जा रहा था परन्तु फिर भी हम उन्हे खिलाने का प्रयास प्रतिदिन करते ।🍉🍌

 

चतुर कपिला मम्मा 3
4 दिन से वह अपने बच्चे गोपाला के पास आ जाती,और शाम तक वहीं बैठी रहती| शायद उनको आभास हो गया था, इसलिए वह मुक्त होने से पहले अपने छोटे से बच्चे को यथासंभव प्रेम (माता का) देना चाहती थी ,क्योंकि गोपाला अब सदा के लिए उस प्रेम से वंचित होने वाला था।| शाम को जब वह अपनी माता को ढूंढेगा तो उसे कौन बताएगा कि उसकी माता सदैव के लिए परमधाम चली गई है, और अब कभी दिखाई नहीं देंगी।

 

चतुर कपिला मम्मा 4
कल जब सोलन से उनके लिए विशेष दवाइयां मंगाई गई तो मुझे बहुत घबराहट और चिंता हुई। इसलिए जब आज सुबह कपिला मम्मा बाहर वाली गौशाला में दिखाई नहीं दी तो किसी अनजाने डर ने मेंरे चित्त को घेर लिया । अब भी मेरी अश्रुपूर्ण आँखे गौशाला में कपिला मम्मा को ढूंढ रही है।
अभी उनकी आयु 6-7 वर्ष की ही थी ,जब वह आश्रम में आयी थी तो एक वर्ष की छोटी बच्ची थी ।
हमारे स्वामी जी ने ही उनको कपिला नाम से अलंकृत किया था, यह है संसार रूपी भवसागर से मुक्त करने वाली गऊमाता की मुक्ति गाथा। (गऊदान का महत्व सभी जानते हैं) देखा…. आपने कपिला मम्मा की चतुराई उन्होंन भूखे प्यासे रहकर 11 दिन कठोर साधना की| और 12 वे दिन देवी माँ के नवरात्रि मे निर्वाण प्राप्त किया ।( ऐसा मेरा मानना है)
आप सभी से मेरा निवेदन है कि मूक जीवों की यथासम्भव सेवा व सहायता करे क्योकि वह भी प्रेम और नफ़रत को महसूस करते हैं।
आज मैंने कपिला मम्मा की विदाई के समय उनके माथे को सहलाते हुए उनके कान मे ईश्वर के नाम का उच्चारण किया ,जिसके लिए मैंने मौनव्रत भी तोड़ दिया ( आप कह सकते हैं कि मैं अपने संकल्प मे अनुत्तीर्ण हुई) आज मैं अपनी भावनाओ को नियंत्रित करने मे पूर्णतः असफल रही।
मै श्री हरि भगवान को बहुत बहुत धन्यवाद देती हूँ , अपनी कृपा दृष्टि में रखकर (आश्रम में )मुझे मूक जीवों को समझने का अवसर दिया।
तेरी मर्जी बिना पत्ता भी ना हिलता।

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Karuna Om

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