चुग्गी…. जी हाँ ….. वह चिड़िया की तरह छोटी सी थी ,इसलिए उसका नाम चुग्गी रखा। जनवरी 2020 में जब वह आश्रम आई तब उसकी आयु लगभग 2 महीने की होगी। शरीर के सारे बाल जले (आग) होने के कारण हड्डियों का ढांचा सी दिखती थी। ,आंखों व नाक से पानी बह रहा था, क्योकि वह बीमार थी|
दोस्ताना व्यवहार होने के कारण वह सब के साथ खेलती,सभी उसे प्रेम करने लगे थे| उसे कंधे पर बैठना बहुत पसंद था। चुग्गी 2
ठंड अधिक होने के कारण मैं उसको अपने मुलायम शॉल में लपेटकर रखती थी ।क्योंकि बाल न होने के कारण किसी और कपड़े से उसे तकलीफ हो सकती थी| उसे गोद में बैठ कर बातें करना बहुत पसंद था। चुग्गी 3 जब वह सो जाती तो मैं उसे धीरे से चॉकलेट के डिब्बे में रख देती, उसे लगता कि वह गोद में ही हैं ।वह इतनी छोटी थी कि चॉकलेट के डिब्बे में आराम से सो जाती। चुग्गी 4
एक सप्ताह बाद वह कही चली गयी, ऐसा अनुमान था कि जिनकी वह बिल्ली थी वह उसे ले गये हैं ,परंतु 2 दिन बाद वह वापिस आ गई| अब उसकी हालत पहले से अधिक खराब लग रही थी| मैंने उसको दूध में मिलाकर (दोबारा)दवाई देना शुरू किया| परंतु उसे मां की अधिक आवश्यकता थी इसीलिए मैंने उसे ग्रेसी के बच्चों स्वीटी ,ब्यूटी और ब्लैक के साथ गोद में बिठाए रखा(जो उसी की आयु के थे)। चुग्गी 5 जिससे सब बच्चों के शरीर की गंध एक जैसी हो जाए क्योंकि बिल्लियाँ अपने बच्चों को उनके शरीर की गंध से ही पहचानती हैं ।शाम को चारों बच्चों को मैंने उनके घर में एक साथ रख दिया। पहले दिन तो ग्रेसी उलझन में (confusion) रही, व उसने अपने बच्चों को भी पास आने नहीं दिया और बच्चे रात भर घर में अकेले ही रहे ।
अगले दिन चारों बच्चों के प्रेम जताने पर वह शांत हुई क्योंकि शायद अब बच्चों के शरीर की गंध एक जैसी थी। चुग्गी प्रेम जताती तो ग्रेसी भी उसे अपने बच्चों जैसा ही प्रेम करती| मैंने ऐसा कभी नहीं देखा था इसलिए मेरे लिए यह चमत्कार जैसा था। ग्रेसी चुग्गी को सदैव अपने साथ रखती । चुग्गी 6
परंतु चुग्गी की तबियत पहले जैसी ही थी। इसीलिए तीनो बच्चे उसके साथ खेलते नहीं थे। बच्चों को संक्रमण का खतरा होने के कारण मैंने चुग्गी को अपने साथ रखना ही उचित समझा|
14 फरवरी को चुग्गी की तबीयत बहुत बिगड़ गई और उसको पूसा(सबसे पहली बिल्ली) की तरह चक्कर आने लगे ।दवाइयों का कोई असर नहीं हो रहा था ।
17 फरवरी की सुबह चुग्गी हमारे दरवाजे के सामने बेहोश पड़ी थी , हमने उसे धूप में रखा परंतु वह शाम 4:00 बजे बेहोशी में ही बिल्ली शरीर को अलविदा कहकर फुररर्र हो गई| चुग्गी 7
जैसी भगवान की मर्जी ।
कौन कहे साहेब से , ऐसा कर ऐसा न कर ।😊
जय श्री हरि ।।😍

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Karuna Om

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