प्रणाम मेरे प्यारे दोस्तों ,

मीरा बाईं की पंक्तीयों की अभिषेक की पोस्ट पढ़कर मैं बहुत हि भावपूर्ण हो गयी हूं । मैं अपनी भावनाएं कविता के रूप में व्यक्त करना चाहती हूं , उसके लिए जो मेरे चित्त का चितचोर है और जिसके प्रेम में मैं दिवानी हूं 🙏❤️❤️

बिन मांगे हि कायनात मिल गई ,
आज तेरे दर पर मुझे जन्नत मिल गई ।

फरीश्तों से पूछा करते है तेरा पता ,
हर मंदिर में ढूंढा करते है तेरे निशान ।

मेरे जीवन की मंजिल तू है
मेरे रूह कि पेहचान तू है
तू हि है हर ख्याल में मेरे
तू हि है हर आशा मे मेरे
तुझसे बंधा है बंधन ऐसा
हर जनम से तेरा मेरा रीश्ता

मेरी बातों से तू मुझे बेवफ़ा मत समझ ,
प्रेम है तुझसे इससे तू इनक़ार ना कर ।

चाहा है मैंने तुझे अपनों से भी ज्यादा ,
मांगा है तुझे हर दुवा में अपने ।

ना कुछ पाने कि आस है
ना कुछ खोने का डर है
तमन्ना है मेरी तुझे पाने की
तेरे ईश्क में फ़ना होने की
ना कर तू मुझे अपने से जुदा
कर रेहम दे तेरे दिल में जगह

तेरे संग लग गई है मेरे मन कि लगन ऐसी ,
तेरे प्रेम के रंग में रंग गई है मेरी चुनर कैसी ।

सितारो में अक्सर तुझे देखा करती हूं ,
चांद की रोशनी में तेरे लिए कविता लिखती हूं ।

हर जख्म कि दवा तू है
हर दर्द का ईलाज तू है
जो तू नहिं तो मैं भी नहिं
जो तू नहिं तो कुछ भी नहिं
तेरी यादों में मुझे खोने दे
तेरी गोद में सिर रखकर सोने दे

तेरी मेहरबानी से रोशन है आशियाना मेरा ,
तेरी यादों के इत्र से उजागर है हर सवेरा मेरा ।

🌷 हरी ॐ 🌷

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Amruta

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