दहेज शब्द को सुनकर कौन सा विचार आपके मन में दस्तक देता है यह शब्द तो छोटा है, परन्तु स्वरूप समुंद्र सा विशाल है ।
कन्या पक्ष की ओर से दिए गए उपहारों को दहेज कहा जाता था परंतु अब…..दहेज का अर्थ कुछ और ही हो गया है ।😎
किसी दूसरे की जमा पूंजी को हठपूर्वक हड़पने की साजिश को क्या दहेज कहना उचित होगा? किसी को अपनी अनुचित मांग पूरी करने के लिए बाध्य करने को क्या कहा जाए ?,दहेज या भीख? भिखारी और दहेज के लोभी में सिर्फ यह अंतर है कि भिखारी घर के दरवाजे के बाहर व धन के लोभी कन्या पक्ष के अतिथि कक्ष में बैठकर (Drawing room )भीख मिलने का इंतजार करते हैं। 😠
कन्या का रिश्ता तय होने के बाद से ही यह सिलसिला शुरू हो जाता है| मंगनी ,सगाई , शादी ,जन्मदिन ,शादी की सालगिरह , होली, दिवाली अन्य त्योहारों बच्चे के जन्म ,मुंडन , आदि पर वर पक्ष की माँग सुरसा के मुंह की भांति बढती ही जाती है।कुछ परिवारों में तो वधू का व्यक्तिगत सामान भी ले लिया जाता है| और ससुराल वाले वधू  को (जिसे घर की इज्जत कहा जाता है) किसी के सामने शर्मिंदा करने से भी नहीं चूकते(मुंह मांगा दहेज मिलने पर भी)|🤔
मेरा यह आशय नहीं है कि किसी के दिए गए उपहार को ठुकरा कर उसका अपमान किया जाए ,क्योंकि समाज व परिवार में हम अकसर उपहार का आदान -प्रदान अवश्य करते हैं ,यह भी आदर व प्रेम जताने का एक तरीका है ।परंतु किसी को महंगा और अपनी पसंद का उपहार देने के लिए बाध्य करने से सम्बन्धो मे दरार आ सकती है।कभी -कभी विवाह से पूर्व ही कुछ परिवारों में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है ।
इस दहेज रूपी कुरीति को समाप्त करने के लिए हमारी अगली पीढ़ी बहुत कुछ कर सकती हैं| जैसे …..
1. बच्चे यदि अपनी पसंद से विवाह करते हैं ।
2.यदि युवा वर्ग (वर )विवाह में दहेज लेना अस्वीकार कर दे।
3. कुछ माता पिता दहेज देते हुए असहज महसूस करते हैं परन्तु वही बेटे की शादी में दहेज लेने के लिए तत्पर हो जाते हैं यदि वह भी संकल्प करें कि हम बेटे की शादी में भी दहेज नहीं लेंगे|
4 .यदि माता-पिता बेटी को संपत्ति देते हैं तो उस पर पूर्णता: अधिकार बेटी का ही होना चाहिए । जिससे बेटी आर्थिक रूप से सशक्त रहेगी|☺
एक सत्य घटना मुझे याद आ गई.. बात तब की है, जब हम अपनी बेटी के लिए रिश्ता ढूंढ रहे थे ।एक लड़के की बुआ और फूफा हमसे मिलने आए जब मैंने उन्हें बताया कि विवाह में खर्च की जाने वाली राशि का 50% हम अपनी बेटी को ही देंगे ,तब वह बहुत नाराज हो गए और कहने लगे कि सारी धनराशि हमारे बेटे के नाम से ही देनी होगी, जिससे विवाह के बाद धन की आवश्यकता पड़ने पर खर्च की जा सके|अब आप ही बताइए… कि उनको कैसे पता था कि विवाह के तुरंत बाद धन की आवश्यकता पड़ने वाली है?😏 मुझे उनकी मानसिकता पर बहुत अफसोस हुआ।😢
अपने बेटे के जन्म पर मैं इसलिए खुश थी कि इस दहेज नाम की कुरीति को दूर करने मे एक सार्थक कदम मेरा भी होगा हालाँकि इस पर अपने परिवार के बड़े -बूढ़ों से मुझे कुछ खरी-खोटी भी सुननी पड़ी थी ।(हा हा हा )😔
नमन है हिमाचल प्रदेश को ,क्योकि यहाँ दहेज प्रथा नहीं है ।दहेज का नाम लेने वाले व्यक्ति की पिटाई कर दी जाती है ।( ऐसा आश्रम में कार्यरत गांव वालों ने बताया है।)☺
संत कबीर ने भी कहा है मांगन मरण समान है, मत मांगो कोई भीख|
आपकी दहेज नामक विषय पर क्या राय है कृपा अपनी टिप्पणियों के द्वारा मुझे जरूर अवगत कराएं।☺ धन्यवाद ।
जय श्री हरि।😍

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Karuna Om

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