तुमने कहा, “दोस्ती है!”
मैंने मान लिया।
तुमने कहा, “नहीं, इश्क़ है।”
मैंने मान लिया।

मेरा मन विरक्त था।
जानता था केवल दो ही रंग- गेंरुआ और गहरा नीला।
इन आँखों ने मोहब्बत के सिर्फ वही दो रंग तो देखे थें!

गेंरुआ – जो गुरुदेव ने अपने शरीर पर धारण किया हुआ है।
और,
नीला – जो महादेव ने अपने गले में धारण किया हुआ है।

इससे परे भी इश्क़ का कोई रंग है, मेरे मन को ना खबर थी, ना जिज्ञासा।

तुम आए और एक गहरा लाल रंग चढ़ा दिए मेरे वजूद पर।
और मैं?
मैं स्तब्ध हो खुद को देखती रह गयी।
शमशान के भस्म में रमने वाला मेरा मन
ना जाने कैसे सिन्दूरी हो चला था।

सोचा कि रोक लू खुद को एक बार।
जानती थी कि मोहब्बत सर-ए-आम भरे बाज़ार में नीलाम कर देगी।
पर नहीं रोका मैंने खुद को। प्रकृति कभी इश्क़ को नहीं रोकती।
क्या कभी देखा है तुमने कि किसी फूल को प्यार करो
और वह तुरंत कली हो जाए दोबारा!
क्या कभी किसी पेड़ से लिपटते ही वह ज़मीन में धस गया है कभी?
क्या सूर्य को प्रेम से अर्घ्य देने पर वह बुझ जाता है!

मैं स्वयं में प्रकृति समेटे बैठी हूँ।

कैसे इश्क़ को रोक देती भला!
महाकाल गवाह हैं जब जब प्रकृति ने प्रेम को रोका है
ब्रम्हांड प्रलय का साक्षी रहा है !

और कहते हैं जब इश्क़ बर्बाद करने पर आए
तो पूरी कायनात उस बर्बादी का षड़यंत्र रचती है!
बर्बादी “मैं” की।
बर्बादी “अहम्” की।
बर्बादी “काम-क्रोध-मोह-लोभ-ईर्ष्या” की।

जब उसने कहा कि, “इश्क़ हैं!”
तो मैंने भी झोंक दिया खुद को आग में –
ये जानते हुए कि मेरे समूचे अस्तित्व का विनाश निश्चित है।
पर यही तो सारी साधनाओं का ध्येय होता है ना
कि अस्तित्व का विनाश हो जाए?
कि व्यक्ति खुद से परे हो जाए?

जब उसने कहा कि, “इश्क़ हैं!”
तो मेरे भीतर की प्रकृति
उसके भीतर के पुरुष को
पूर्णतः समर्पित हो गयी।
एक सन्यासी की रूह ने
सुहागन होना मंज़ूर किया।
रुद्राक्ष ही प्रणय-सूत्र बना।
भस्म का रंग सिन्दूरी-लाल हो गया।

प्रेम में जब शिकायतें ना हो,
अपेक्षाएं ना हो,
आलोचना ना हो,
तो प्रेम साधना हो जाता है।

इसी प्रेम-तपस्या में प्रकृति तपती आयी है
चिरकाल से-
कभी सती के रूप में आत्मदाह कर,
कभी सीता के रूप में राम से अलग होकर,
कभी मीरा बन विरह का विष धारण कर
कभी राधा बन वक़्त की गलियों में खोकर,
और कभी पार्वती बन
किसी असाध्य तपस्या में लीन होकर।

प्रेम में आप किसी को बांधते नहीं।
यह वह बंधन है
जो आपको हर बंधन से मुक्त कर देता है।

इसलिए जब उसने कहा, “अब इश्क़ नहीं है!”
तो मैंने मान लिया।
मेरे भीतर छुपी प्रकृति में प्रलय आ गया –
असंख्य ज्वालामुखी फूट पड़ें !
सब दहकने लगा अंदर –
सब जलने लगा।

शयद फिर सती के आत्मदाह की साक्षी थी सृष्टि!
मन की बिसात क्या जब आत्मा टूट के बिखर गयी हो!

जो भीतर था, वही बाहर प्रकट हो रहा था।
पुरुष-प्रकृति और प्रेम 1

खुशनुमे बसंत के सीने पर अनायास
आंधी, तूफ़ान और वज्रपात होने लगा था।
ओले पड़ें। आम के सारे बौर झड़ गयें।

इतिहास पुनः प्रत्यक्ष हो रहा है।
पुरुष के विरह में प्रकृति को पुनः जलना है
अनिश्चित काल तक।

द्वन्द इसका नहीं कि वह अब प्रेम करे या नहीं।
प्रेम किया नहीं जा सकता। किसी की औकात नहीं।
प्रेम स्वयं ईश्वर है। कृपा की तरह होती है खुद से ही।आप बस पात्र हो सकते हैं कृपा के…प्रेम के।

प्रकृति कभी पुरुष से प्रेम करना नहीं छोड़ सकती अनंतकाल तक!
शक्ति शिव की ही है सदा से … श्री नारायण की!

द्वन्द बस इतना सा है कि अब प्रकृति सुहागन का साज उतार
किसी विधवा सी धूसर हो पुनः भस्म ओढ़ ले या नहीं!

#समर्पित उस परमपुरुष को|

(Contextual meanings in English are given below).
Thank you for reading..Love and Light!

पुरुष-प्रकृति – The Masculine and Feminine Principles of Universe (Shiva and Shakti in Macrocosmic level and Man and Woman in Microcosmic level)

विरक्त – detached

इश्क़/मोहब्बत/प्रेम – (here) unconditional divine love

गेंरुआ – ochre

गहरा नीला – deep blue

धारण – to wear or to contain

खबर – knowledge

जिज्ञासा – curiosity

गहरा लाल – deep red, the colour of blood

वजूद/ अस्तित्व – individual existence

स्तब्ध – stunned

शमशान – cremation ground

सिन्दूरी – the colour of vermillion

सर-ऐ-आम / भरे बाज़ार – publicly

नीलाम – auctioned (basically to be bankrupt)

कली – bud

लिपटते – to embrace

धसना – to enter back inside the ground

अर्घ्य – to offer water

बुझना – to extinguish

मैं स्वयं में प्रकृति समेटे बैठी हूँ – I contain the entire Nature inside me (As in Microcosm, so in Macrocosm)

गवाह/ साक्षी – witness

ब्रम्हांड – Universe

प्रलय – destruction

बर्बाद – destroy

कायनात – Universe

षड़यंत्र – conspiracy

अहम् – Ego, the sense of “I”

काम – Lust

क्रोध – anger

लोभ – greed

मोह – attachment

ईर्ष्या – jealousy

समूचे – entire

विनाश – destruction

निश्चित – definite, inevitable

साधना – spiritual practice

ध्येय – goal

व्यक्ति – individual

पूर्णतः – completely

समर्पित – surrendered

सन्यासी – detached

सुहागन – a married woman

रुद्राक्ष – Rudraksh

प्रणय -सूत्र – Literally the thread of love, a thread worn by married women in Sanatan Dharma; also called mangalsutra

भस्म – crematory ashes

सिन्दूरी लाल – the colour of vermillion

शिकायतें – complaints

अपेक्षाएं – expectations

आलोचना – judgments

प्रेम-तपस्या – The austerity of Love or the austerity that one goes through in love

तपती – to burn (not literally!), to perform severe austerities

आत्मदाह – self-immolation

विरह – separation

विष – poison

वक़्त – time

गलियों – in the alley

असाध्य – extremely tough to achieve

बंधन – shackles

बांधना – to tie down

असंख्य – umpteen, many

ज्वालामुखी – volcano

दहकना – to blaze

सृष्टि – Universe

बिसात – authority

प्रकट – to manifest

बसंत – spring

सीने – chest or bosom

अनायास – all of a sudden

आंधी/तूफ़ान – storm

वज्रपात – thunderbolt

ओले -hailstorm

आम के बौर – Mango blossoms

इतिहास – history

पुनः – again

प्रत्यक्ष – in front/evident

अनिश्चित काल – Indefinite time period

द्वन्द – dilemma

औकात – authority

ईश्वर – God

कृपा – Grace

पात्र – to be worthy of

अनंतकाल – eternity

शक्ति – Mahadevi/ Aadi ParaaShakti (The Primordial Energy) (Maa Parvati)

शिव – Lord Shiva

श्री – Maa Lakshmi

नारायण – Lord Vishnu

विधवा – widow

धूसर – greyish

ओढ़ना – to wear/ smear

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