मुझे लगता है , पेड पर बैठा हाथी कुछ सोच नहिं रहा । वो एकांत में शांत बैठा है । उसे अब अपने मित्रों के साथ पानी में डूबकी लगाने में मजा नहिं आता । ना हि उसे एक जंगल से दुसरे जंगल घूमने में अब कोई रूची हैं । दुसरों के साथ गपशप करने में अब उसका मन नहिं लगता । कोई उसकी तारीफ करे तो वो अत्यानंदित नहिं होता । कोई उसकी निंदा करे तो उसे बुरा नहिं लगता । कोई चीज उसके पास है , तो ठिक है । कोई चीज उसके पास नहिं है , तो भी ठिक है । उसे अब कुछ पाने कि इच्छा नहिं है । उसे अब कुछ खोने का डर भी नहिं है । उसे ना हि किसी को कुछ पुछना है और ना हि किसी को कोई सलाह देनी है । उसने अपना मार्ग चुन लिया है । ना हि उसे कोई काम निपटाने की जल्दि है ना हि किसी बात की कोई चिंता है । उसे ना हि किसी को उत्तर देना है और ना हि उससे कोई सवाल पुछने वाला है । दुनिया की भीड भाड से दूर , अकेले , शांती से बैठकर वो अपने हि आनंद में मग्न है । अब अगर उसे अपने जीवन में कुछ चाहिए तो वो है केवल –

🌷 शांती 🌷

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Amruta

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