जब रक्षक ही भक्षक बन जाये,
तो हाहाकार ही होगा,
वो कहती नहीं सहती हैं, “प्रकृति”
आओ चले उसके समावेश मे..

शून्य में विराजमान,
कर रहा हैं आव्हान,
लग चुकी गुहार हैं,,
मनुज तू ही गुनेहगार हैं।
सून्न पडी प्रकृति,नवीन होता जल का खेल,
पथिक हुआ पवन वेग,
काटे इसके आभूषित तरु जाल,
रोका इसका अम्बर विशाल,
चाह यही, सब हो तेरे कृत्रिम गुलाम,
ये मौन हुई पीर ,ज्यादा न सह पायेगी,
“बोये सो पाये”क्षणभर मैं लौटा जायेगी,
फिर नहीं होगा तेरा,’कोई’ हाल।
आओ चले उसके समावेश मे…………

लख चौराबसी जीव पडे तेरी शरण,
देख जरा पुलकित होकर छाया मरण,
कर्ण हो तो सुन जरा ये त्राहि माम्-त्राहि माम्,,
“आखँ का अन्धा”भी कैसा? जो करें स्वयं का ही अंग हरण।।

किलकारियों से रोदन तक,
शकुंतला के सौंदर्य जैसा,
कल्कि अवतार तक,
नहीं है आनंद उसकीं गोद जैसा,,
आओ चले उसके समावेश मे…………


Meaning in english of some words:

Shunya-  Zero

Manuj-  Human

Pathik- wanderer

Kritim- Artificial

kalki- Expected incarnation of Lord Vishnu

Karn- Ear

Taru- Trees

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Rachit Divj

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