पिता के बारे में लिखे शब्दों को पढ़ना प्रारंभ किया तो लगा की मेरी बेटी ही अपने जनक के विषय में बचपन के सीखने के तौर -तरीकों को उद्धृत कर रही है। स्थान, वातावरण, परिवेश भिन्न होते हुए भी इतना साम्य ! रचयेता की रचना अलौकिक है। धन्य है वो संतान जिस के सिर पर माता पिता का हाथ है और धन्य हैं वे जनक जिनकी संतति अपनी मन -मंजूषा में उनके साथ बिताए पलों को संजोए है – संस्मरण कोष के रूप में। इस विस्तृत कोष में संग्रहित अन्य अमूल्य रत्नों से भी जन मानस परिचित हो। इसी भावना के साथ दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि !

वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, भगवदगीता, कल्याण आदि ग्रंथों का श्रवण -पारायण, भक्ति गीतों की गुंजन के वातावरण में पालन पोषण हुआ। बड़े से घर के विभिन्न कमरों की आलमारियों में सजी पुस्तकें, समाचार -पत्र, पत्रिकाएँ व पुस्तकालयों से उपलब्ध पुस्तकें। पुस्तक- चाट ऐसी लगी कि सत्तर बरस की होने पर भी पुस्तक चटखारा आकर्षित करता है। बेटी के पुस्तक -संकलन से The Book of Faith पढ़ी। आजकल The Children of Tomorrow पढ़ रही हूँ। आंग्ल भाषा में पढ़ना भी अच्छा लगता है, फिर भी हिंदी में (अनुवाद ही सही ) मिल जाए तो मेरे जैसे बहुतों का आनन्द द्विगुणित हो जाए।

बेटी को दीपावली के दिन आपके श्री-मुख दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वर्णन पढ़ -सुन कर मन में दर्शन की इच्छा बलवती हो उठी है ! पूज्ये श्रीहरि का सन्निध्य हो, आपके श्री -वदन से उच्चरित मधुर वचन का श्रवण हो, ऐसे सुख -सौभग्य की आकांक्षा है। श्रीहरि कृपालु हों !

जिस जननी की कुक्षि से सर्वगुण सम्पन्न पूत का उद्भव हुआ उनके श्री’चरणों में कोटि -कोटि प्रणाम ! वे शतायु हों !

Pic : Unsplash

Pay Anything You Like

Sarita Saini

Avatar of sarita saini
$

Total Amount: $0.00