1. यह जो ऊपर कुछ फ्लावर्स दिख रहा है यह मैंने हिमालय में 10500 फुट की ऊंचाई पर  क्लिक की है ..अब इसका नाम बताना है.. मुझे प्रकृति बहुत पसंद है इसीलिए मैं जंगलों में झरने के पास ऊंचे खतरनाक पहाड़ियों पर चलना बहुत पसंद करता हूं। आज अपनी वह दिनचर्या साझा कर रहा हूं ।जो थोड़ी ना सही कुछ मात्रा में भी अगर कोई अपने जीवन में शामिल करलिया दवाइयों के भरोसे नहीं जीना पड़ेगा। जैसा कि मेरा विचार है की जीवन ही इस तरह से जियो ताकि कभी हमें चिकित्सा करवाने की आवश्यकता ही नहीं पड़े।
  2. कल    हमने इस बात पर विशेष जोर दिया था कि हमारी एक स्पष्ट दिनचर्या होनी चाहिए ।अगर हम समय के साथ अपने सारे क्रियाकलापों को नहीं करते हैं तो हमारा स्वास्थ्य अधिक दिनों तक अच्छा नहीं रह पाएगा। अक्सर लोग कहते हैं कि भोजन टाइम से होना चाहिए जी नहीं सिर्फ इतना ही काफी नहीं है भोजन के साथ साथ  सोना, जगनाा,व्यायाम,साधनाा,पढ़ाई या अन्य तरह के क्रियाकलाप उन सब को भी हमें टाइम से करना चाहिए हमारा शरीर एक रूटीन में कार्य करने के लिए तैयार हो  जाताा है।कुछ दिनों में अभ्ययास्थ हो जाता है और उसे उस रूटीन को फॉलो करने में कहीं कोई परेशानी नहीं होती है ।
  3.    सबसे पहली बात होती है कि हम सुबह उठते कितने बजे हैं, मेरी अगर पूछो तो मैं 3:00 बजे अंधेरे में ही जग जाता हूं ।हालांकि उस समय हर कोई नहीं जग सकता क्योंकि दिल्ली जैसे शहर में तो 1:00 बजे रात में लोग सोते ही हैं हमने देखा है ऐसा, और दिन के 10:00 बजे तक सोए रहते हैं।  पर कोशिश करनी चाहिए आयुर्वेद कहता है कि हमें ब्रह्म मुहूर्त में अपने बिस्तर छोड़ देनी चाहिए ।ब्रह्म मुहूर्त का समय सूर्योदय से पहले का होता है 3:00 बजे ना सही 4:00 या 5:00 बजे तक तो जरूर अपने बिस्तर से उठ ही जाना चाहिए ।मैं उठता हूं उसके बाद वॉशरूम से आकर के व्यायाम करता हूं चाहे मैं कहीं भी क्यों ना रहूं फिजिकल एक्टिविटी करना बिल्कुल नहीं छोड़ता ।कुछ लोग शारीरिक श्रम करना अपने शान के खिलाफ समझते हैं ।आपको पता होना चाहिए कि जब हम भोजन करते हैं तो फिर मेटाबॉलिज्म की जो एक्टिविटी हमारे शरीर में होती है उससे हमारे ब्लड में बहुत सारे टॉक्सिंस बन जाते हैं ।मेटाबॉलिज्म के दौरान बने हुए उस टॉक्सिंस को  रिलीज करने के लिए पसीना बहाना बहुत आवश्यक है। लेकिन वह पसीना जो हम एक्सरसाइज करके निकालते हैं वह होना बहुत आवश्यक है ,पड़े पड़े जो पसीना निकल रहा है उसमें वह खास बात नहीं होगी। इसके साथ ही व्यायाम करने से हमारे शरीर का रक्त संचार तीव्र गति से होता है ।ब्लड में ऑक्सीजन पर्याप्त  मात्रा प्रवाहित होती है और ऑक्सीडेशन बिल्कुल सही प्रक्रिया से हो पाती है ।हमारे  फेफड़े का भी शानदार एक्सरसाइज हो जाता है ।अगर हम ब्रह्म मुहूर्त में उठकर व्यायाम करते हैं तो अनायास ही इतने सारे फायदे बिना कुछ खर्च किया मिल जाते हैं ।इसलिए मैं कभी भी ब्रह्म मुहूर्त में उठने से समझौता नहीं करता ।
  4. अधिकांश लोगों के जीवन में यही समस्या है कि वह 5:00 बजे से पहले ही नहीं उठ पाते ।जो 5:00 बजे के बाद उठते हैं उनका शरीर भारी भारी रहता है, मन में प्रसन्नता नहीं रहती, खिन्न रहता है मन,शरीर में शक्ति की कमी होती है,एक स्फूर्ति नही आ पाती, व्यायाम करने से हमारे नसों में और मांस पेशियों में एक  फ्लैक्सिविटी आती है जिसकी बदौलत हम अधिक दिनों तक युवा रह पाते हैं।
  5. मैं उठता हूं ब्रह्म मुहूर्त में फिर न सर दर्द होता है ता है ना कभी पेट से संबंधित कोई समस्या होती है, ना कभी थकावट होती है हमेशा एक नवीन चुस्ती फुर्ती हमारे शरीर में बना हुआ रहता है ।मैं  चाय नहीं पीता ।ज्यादातर लोग सुबह उठते ही सबसे पहले चाय की डिमांड करते हैं बिल्कुल गलत है। सुबह उठते ही सबसे पहले हमें गर्म पानी पीना चाहिए, इससे क्या फायदा होगा रात भर जो हमारे मुंह में लार बना जिसेे सेलााईवाा कहते हैं,वह बेहद जरूरी होता है पाचन संस्थान को मजबूत करने के लिए।  सोकर उठते ही हमें हल्के गुनगुने गर्म पानी के साथ पूरा का पूरा पी जाना चाहिए इससे हमारे शरीर के अंदर भोजन को पचाने में काफी हद तक सहायता मिलती है।
  6. मैं सिर्फ वही बातें लिखूंगा तो स्वयं करता हूं और तीसरी सबसे खास बात है कि हमें 9:00 बजे से पहले कोई पौष्टिक नाश्ता अवश्य कर लेना चाहिए जो कि पकाया हुआ नहीं हो ,प्रकृति ने जिस रूप में उसे पैदा किया वह बस उसी रूप में हो चाहे तो कोई स्प्राउट्स हो सकता है कोई फल हो सकता है। अगर हम सुबह 9:00 बजे से पहले नाश्ता नहीं करते हैं तो बहुत बड़े घाटे में रहते हैं। सुबह 9:00 बजे से पहले हमारे शरीर के अमाशय में पर्याप्त मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक एसिड निकलता है और वह एचसीएल हमारे भोजन को पचाने के लिए सबसे कारगर साबित होता है ।उस समय अगर हम उचित नाश्ता ना दे तो धीरे-धीरे हमारे आमाशय में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है और एसिडिटी से हो सकती है , हाइपर एसिडिटी की समस्याएं, खट्टी डकार ,पेट में गैस बने रहना तमाम तरह की बीमारियां होती है ।तो हमारी रूटीन जो है वह 9:00 बजे तक में इतना अवश्य होना चाहिए कि हम ब्रह्म मुहूर्त में जाग जाएं ,जगने के पश्चात शौचालय से आकर के हम कुछ व्यायाम करें व्यायाम करके  फिर हमारे दैनिक जीवन में साधना या उपासना के लिए एक नियत समय अवश्य रहना चाहिए। सिर्फ शारीरिक व्यायाम ही आवश्यक नहीं है हमारे मन और मस्तिष्क को ,आत्मा को भी सही खुराक देने के लिए साधना परम आवश्यक है। जिस आदमी के जीवन में कोई साधना नहीं है, कोई मेडिटेशन नहीं है कोई पूजा पाठ नहीं है वह आदमी जीते जी पशु के समान है। तो इतनी चीजें होनी चाहिए ब्रह्म मुहूर्त में जगना व्यायाम करना साधना करना और 9:00 बजे से पहले नाश्ता कर लेना। अब स्वास्थ से संबंधित कुछ और बातें फिर आगे बताऊंगा आज इतना ही🙏🙏🌹🌹💐💐🥀🥀🌾🌾🌱🌱🌿🌿🌻🌻🌼🌼🌲🌲🌳🌳🌴🌴

तब तक के लिए प्रकृति से जुड़े रहिए और स्वस्थ रहिए……………🌿🌿🌻🌻🌱🌱

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Ashu Harivanshi

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