कभी-कभी मैं सोचा करता था अन्य लड़कों की तरह मेरी तबीयत क्यों नहीं खराब होती, दूसरे लड़कों की तरह स्कूल या कॉलेज से छुट्टी पाने के लिए मेरे पास कोई बहाना नहीं मिलता था। मुझे शौक लगता था काश मेरी भी कभी तबीयत खराब हो और लोग मेरे प्रति सहानुभूति  रखें ।मैं देखता था कि मेरे साथ काम करने वाले भी कवि सर्दी का बहाना करके कभी बरसाती मौसम  बदलने की बात करके या कभी बहुत गर्मी में तबीयत खराब हो जाने की बात करके छुट्टियां मार लिया करते थे पर यह तो मैं झूठ नहीं बोलता और दूसरी मेरी तबीयत भी खराब नहीं होती ।तो मुझे लगता था यह गलत है कभी ना कभी तो मेरी भी तबीयत खराब होनी ही चाहिए 😆😆

               अक्टूबर 2020 का समय चल रहा था पूरे बिहार में जबरदस्त बारिश हुई थी और लगातार 36 घंटे तक बारिश हुई थी। इस वजह से पूरे पटना में बाढ़ जैसी स्थिति हो गई थी ।क्योंकि मैं पटना में ही रह रहा था लोगों के घर में छज्जे तक पानी आ गई थी ।जो लोग निचले तल पर रह रहे थे वहां उस कमरे को छोड़कर अन्य जगहों पर रहने के लिए मजबूर हो गए और इसके साथ ही उनके घर का बहुत सा सामान बर्बाद हो गया। यह जलजमाव की स्थिति करीब 15 दिन तक रही थी पटना में। 

           हम लोग विश्व हिंदू परिषद से बिलॉन्ग करते थे अतः किसी भी आपदा  हम और हमारे दोस्त तुरंत लोगों की सहायता करना प्रारंभ कर देते हैं वैसे ही इस जलजमाव की स्थिति में भी ट्रकों पर आवश्यक सामग्री लादकर दूर-दूर के इलाकों में जाकर लोगों को मदद करना शुरू कर दिया। इस कार्य में मेरे कई साथी मेरे साथ थे। पटना हवाई अड्डे के पास वाले इलाके में जलजमाव की बहुत ही गंभीर स्थिति थी ।एक दिन हम लोग अपने दोस्तों के साथ ट्रक में जो भी आवश्यक सामग्री थी उसे भरकर उस जगह सेवा कार्य के लिए गए। हम लोगों ने अपने सर पर खाद्य सामग्री के पैकेट्स उठा उठाकर लोगों के घर के दरवाजे तक जा जाकर उन्हें सामान पहुंचाया और इस कार्य के लिए हमें लगभग छाती भर पानी में डूब कर के और सर के ऊपर आवश्यक खाद्य सामग्री रखकर जाना होता।  यह बहुत ही कठिन कार्य था और इसमें सुबह से शाम हो जाती थी। कहने को तो हम हिंदू परिषद के थे लेकिन रास्ते में जो मुस्लिम भी मिलते थे उनके घर में भी जो हमारे पास सामग्री हुआ करती थी वह उसी भाव से हम देते थे जैसे अन्य को देते थे। इस तरह दिन भर हमारा कार्य बहुत जोर शोर से हुआ और शाम में मैं अपने दोस्तों के साथ वापस हो गया और घर आकर स्नान करके थोड़ा नाश्ता किया और सोने की कोशिश की। उस दिन पूरी रात मैं सो नहीं सका। पूरे शरीर में दर्द हो रहा था और एक बार भी रात में नींद नहीं आई। सुबह होते होते मैं समझ गया कि मुझे फीवर लग गई है और थी वह इतनी जोर से आई थी कि मैं बुखार से कांप रहा था ।चलने की भी ताकत हमारे अंदर नहीं रह गई थी।लेकिन एक ही दिन में मेरा बुखार शाम होते-होते लगभग खत्म हो गया क्योंकि मैंने अपने आयुर्वेद का ज्ञान अपने ऊपर चेक करके देखा और उससे मुझे सफलता मिली।

              हमारे शरीर पर बाहरी किटाणुओ का संक्रमण होता है तो हमारे अंदर वाइट ब्लड कॉरपसल्स में जो बाहरी कीटाणुओं से लड़ने की ताकत होती है वह लिंफोसाइट से आती है। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता अंदर से जितनी मजबूत होती है उतना ही वह बाहर के कीटाणुओं को अपने ऊपर प्रभाव डालने से रोकती है ।आपने देखा होगा कि जैसे ही कोई आदमी मरता है तो उसके शरीर में कुछ समय के बाद सड़न शुरू हो जाती है ।ऐसा क्यों हुआ बाहरी कीटाणु तो अभी भी हमारे ऊपर अटैक कर रहे हैं और मरने के बाद भी करते हैं लेकिन जैसे ही शरीर समाप्त हुआ उस की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो गई अब वह कीटाणु उसके ऊपर हावी होंगे और उसे नष्ट करना शुरू कर देंगे ।लेकिन हमें नहीं नष्ट कर पाते इसका एक ही कारण है कि हमारे अंदर  रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है जिसकी इम्यूनिटी  कमजोर रहती है उसके ऊपर बाहरी कीटाणु हावी हो जाते हैं और फिर मौसम बदलने का उसके ऊपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ जाता है या किसी भी तरह की प्रतिकूलता को उसका शरीर जेल नहीं पाता। जैसे ही मुझे फीवर हुआ मैंने नींबू पानी का प्रयोग करना शुरू कर दिया और भोजन बिल्कुल बंद कर दिया। आप नींबू पानी के अलावा जूस ले सकते हैं पर भोजन मत करना। अगर आप भोजन करते हो तो आपकी जीवनी शक्ति तो एक ही है वह जीवनी शक्ति अगर दो कार्य में बंट जाएगी, एक रोग का शमन करने में और दूसरा भोजन को पचाने में तो यह बुखार की स्थिति लंबे समय तक चलेगी। अगर आप भोजन बंद करके सिर्फ नींबू पानी या फल का रस लेते हो तो आपके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकलेगा और पसीने के माध्यम से जो भी टॉक्सिंस है वह बाहर रिलीज होंगे और आपको बहुत जल्द रिलैक्स फील होगा और आप बुखार की स्थिति से बाहर आ जाएंगे ।लेकिन अगर आपने भोजन भी किया तो वह आपकी जीवनी शक्ति भोजन को पचाने में ज्यादा खर्च हो जाएगी और रोग के शमन में उसका कम प्रभाव पड़ेगा। किसी दिन बताऊंगा यह जीवनी शक्ति बढ़ती कैसे है और हमारे किन किन कारणों से यह घटती है। आपने देखा होगा कि अगर किसी पशु को बुखार लग जाती है तो वह भोजन करना बंद कर देता है जैसे ही उसने भोजन किया करना बंद किया अब उसके शरीर की सारी की सारी जीवनी शक्ति एक ही काम पर खर्च होने लग जाती है, वह है उसकी बीमारी का शमन करना। सारी ऊर्जा एक तरफ लग गई तो बहुत ही शीघ्र बिना उपचार किए उसके रोगों का शमन हो जाता है ।वैसे ही हमें भी बिना भोजन किए जितना देर हो सहन करना चाहिए और फिर 1 से 2 दिन के अंदर हमारी तबीयत ठीक हो जाएगी मेरी तो 1 दिन के अंदर हो गई थी.. 

         दूसरी और बहुत जोर की बात बता रहा हूं ।हालांकि इसे कोई अपने ऊपर अप्लाई अपने रिस्क पर ही करना। आज तक मैंने ना कोई मास्क खरीदा है ना सैनिटाइजर खरीदा और ना ही मैंने कोई सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया। मैं किसी भी तरह से आज तक कोरोना से डरा ही नहीं और ना ही उससे सुरक्षा के लिए कोई भी तरीका प्रयोग में लाया । सामने वाले को लगेगा कि यह तो बड़ा गलत कर रहा है ।आप मत करना क्योंकि यह मैं अपने रिस्क पर करता हूं मैंने मेरे मस्तिष्क में अच्छी तरह से फिट कर रखा है की आशु तेरी जीवनी शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी अच्छी है कि किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा तुम्हारे ऊपर नहीं है। मेरा यह अपने स्वास्थ्य के प्रति पूरी गहराई से सकारात्मक सोचना ही मेरे स्वास्थ्य के उत्तम होने में सबसे सहायक बात है । मैंने बहुत गौर से देखा है लोग बीमारी से कम लेकिन बीमारी का नाम सुनते सुनते सुनते सुनते दिन-रात उसके बारे में सोचते सोचते और फिर उसी बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। बार-बार अगर हम अपने स्वास्थ्य के बारे में या परिस्थितियों के बारे में नकारात्मक सोचते हैं तो उसका हमारे स्वास्थ्य के ऊपर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है , फिर हम जिन परिस्थितियों से या बीमारियों से बहुत अधिक डरते हैं वही बीमारियां व्यवहारिक रूप में भी हमारे ऊपर हावी होने लग जाती हैं। यह एक बिल्कुल मनोवैज्ञानिक और शारीरिक संरचना का तथ्य है जिस पर बहुत लंबी चर्चा की जा सकती है ।लेकिन अभी यह चर्चा नही  कर रहा हूं ।जो लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर  या किसी परिस्थिति को लेकर हमेशा डरते रहते हैं उनकी जीवनी शक्ति और रोग प्रतिरोधक शक्ति बिल्कुल ही कमजोर होती है और वह बड़ी आसानी से किसी भी रोग का शिकार हो जाते हैं। मैं इसके बिल्कुल विपरीत कह रहा हूं मैंने अपने दिमाग में अच्छी तरह से फिट कर दिया है कि आशु तू बेहद स्वस्थ और फिट है। तुम्हारे ऊपर इन बाहरी संक्रमण का कोई फर्क नहीं पड़ना। अगर आप इसी सोच को अपने मस्तिष्क में इंस्टॉल करना चाहते हो तो कर सकते हो और इसका चमत्कारिक फायदा उठा सकते हो ।मैंने अपने अनुभव के आधार पर जो बताया वह बिल्कुल मेरा अनुभूत है ।मैं पुस्तकों में तो खूब पढ़ता हूं लेकिन दूसरों को वही बताता हूं जिसका मैंने अनुभव कर लिया है। आज जो दो बातें मैंने सबसे खास बताइ,,,,,,,,,, उसमें पहला यह कि हमें फीवर में भोजन नहीं करना चाहिए अधिक से अधिक जूस या नींबू पानी पीना चाहिए इससे तुरंत रिकवरी हो जाएगी और दूसरी बात यह कि हमें अपने मस्तिष्क में बार-बार यह बात डालनी चाहिए कि हम बेहद स्वस्थ और मजबूत हैं। इन बीमारियों या बाहरी संक्रमण से मुझे कोई खतरा नहीं है तो आपका बार-बार यह सोचना ही आपके अवचेतन मन में एक फ्लैशिबो  ईफैक्ट पैदा कर देगा और आप अपने अंदर एक चमत्कारिक परिवर्तन महसूस करेंगे। यकीन ना हो तो करके देख लो।मेरा तक का फोटो जब मैं जिम करता था

 

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Ashu Harivanshi

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