समस्त os.me परिवार को दिल से नमस्कार।

स्वरचित हास्य कहानी भगवान और वायुयान दुर्घटना का भाग 2 आज प्रस्तुत है, भाग 1 यहाँ पढ़े

मैंने अभी-अभी ही लिखना शुरु किया है, तो कृपया कोई गलती हो तो बताएं, मैं ठीक करने की कोशिश करूंगा।

सज्जन का निपटारा होने के बाद भगवान के हाथों माइक आया और वे कहने लगे, ‘पुत्रों!’ उन्होंने जानबूझकर ‘सपुत्रों’ का उपयोग नहीं किया। क्योंकि वे जानते थे नए नियमों के अनुसार ‘स’ जीएसटी में कट जाता है। ‘आप सभी को मेरे यहाँ आने का कारण पता होना चाहिए।’

निश्चित ही सिवाय एक महिला के भगवान के आने का कारण कोई नहीं जानता था।, जो इस समय बेहोश थीं। भगवान फिर से बोलने लगे, ‘हमारे साथ कई घटनाएं हमारे बिना चाहे और बिना जाने भी हो जाती हैं…’

‘जैसे प्यार’, भगवान ने अपना कथन पूरा किया ही था कि भीड़ से दूर वायुयान के अंतिम कोने में खिड़की वाली सीट पर बैठे एक नवविवाहित तोते और मैना के जोड़े में से तोते ने टांग अड़ायी यानि बीच में बोले। मैना ने भी मुस्कान से अपनी स्वीकृति दी और देते ही शर्म-संकोच-लज्जा से अपना चेहरा दूसरी ओर कर लिया।

तोते को मैना की ये अदा बहुत पसंद आयी, वह मैना को सताने के लिये कहने लगा, ‘देखो न, देखो मेरी तरफ देखो।’ मैना लज्जावश उधर ही देखती रही। इस पर तोते ने अपना मास्टर प्लान अपनाया और कहा, ‘क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती ? देखो अगर करती होगी तो मेरी तरफ जरूर देखोगी। मैं तीन तक गिनती गा रहा हूँ’,

एक,
दो,
सवा दो,
ढाई,
पौने तीन…

‘तीन’ शब्द की आवाज सुनते ही जब मैना ने अपना चेहरा मोड़ा तो उसकी आँखों में आँसू थे। वह धीमे स्वर में रोती हुई बोली, ‘क्या तुम भी! प्यार को साबित करने के लिये बच्चों की तरह गिनती गा रहे हो।’

तोता हँस पड़ा और उसे गले से लगा लिया। दोनों की आँखों में थोड़े-थोड़े आँसू थे।

और अन्य सभी यात्रियों की आँखों में आश्चर्य !

सभी के लिये भले ही यह प्रेम-प्रकरण व्यर्थ हो परंतु उस युगल के लिये तो नि:सन्देह नहीं था। इस बात को भगवान भी अच्छी तरह से जानते थे। इसीलिये उन्होंने उनके सुख से परिपूर्ण भविष्य के लिये आशीर्वाद देते हुए कहा, ‘आप दोनों के जीवन की गाड़ी भली प्रकार गतिमान रहे, और इस वायुयान की भाँति कभी अपना संतुलन न खोये।’

यह कहने के बाद भगवान सोचने लगे कि जब भी वे अपनी बात कहते हैं, तो कोई न कोई बाधा सामने आ जाती है, और वे अपनी बात पूरी कर ही नहीं पाते हैं।

बाधाएँ और रुकावटें हर किसी के रास्ते में आती है, अगर आपके रास्ते में बहुत ज्यादा आती हैं तो आपको देखना चाहिए कि आपके यहाँ किसकी सरकार है!

कुछ लोग इन बाधाओं को पार कर जाते हैं और कुछ आलस में बैठ जाते हैं। रास्तों के कारण अगर आप भी खुद को थोड़ा-सा आलसी मानते हैं, तो भी चिंता की जरूरत नहीं। क्योंकि सरकारें बदलती रहती हैं, रास्ते भी जरूर बदलेंगे।

वैसे भी आलसियों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं। आपको जानकार हैरानी होगी कि नये वैज्ञानिकों के पुराने सूत्रों से पता चला है- सभी आलसी लोग धैर्यवान होते हैं, लेकिन एक भी धैर्यवान आलसी नहीं होता। वे लोग बहुत सारे तंज सहते हैं, उनकी सहनशक्ति बहुत होती है। कोई उन्हें सामने से कामचोर भी कह जाए तो भी वे जीभ को एक से0मी0 भी उसकी जगह से नहीं हिलाते।

ऐसे ही एक इंसान हमारे वायुयान में भी बैठे हुए हैं। इनकी कहानी थोड़ी-सी अजीब है और आलसी भी।

सालों पहले जब ये पैदा हुए तो इनकी उम्र 0 थी, नो स्कोर। अपने पिता की सख्तियों और माता की झपकियों के बीच इनका आलस टूटता-जुड़ता रहा। जवानी के दिनों में एक बेहद खूबसूरत युवती इन्हें अच्छी लगी। इन्होंने पास के बाग से चार गुलाब के फूलों को तोड़ा और धागे से बाँधकर उसे देने के लिये उसके घर गए, लेकिन जैसे ही ये घर पहुँचे, इन्हें आलस आ गया और लौट आए।
एक बार ऑफिस के सहकर्मियों ने इनके बर्थडे पर एक पार्टी प्लान की। रात 8 से 8:30 बजे तक के निर्धारित समय वाली पार्टी में जाने के लिये ये राजी तो हो गए थे। पर इन्हें अपने बाँये जूते का दूसरा साथी कहीं मिल नहीं रहा था। जब कमरे की दसों दिशाओं में खोजकर जूता ढूँढ़ निकाला तभी इन्हें आलस आ गया, और सुबह तक बिस्तर को ही समर्पित रहे।

आगे लेखन जारी है…कुछ ही दिनों में अगला(अंतिम) भाग प्रस्तुत करने की कोशिश करूंगा। आपके सुझाव मुझे दिशा दिखाते हैं, तो कृपया अपने विचार अवश्य बताएं और मेरा मार्गदर्शन करें।

आप सभी का हृदय से धन्यवाद। नमन।🙏

Image by Dominik Scythe on Unsplash

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Amit Kumar

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