उस रात-सी काली बेटी के पैरों के नीचेमाँ 2 ज़रा देखो
कैसे दूध-सी सफ़ेद रौशनी नाचती है !     

ब्रह्माण्ड-मोहिनी के उस श्याम रंग को देखकर               
स्वयं मृत्यु-मोक्ष के अधिपति महाकाल ने
अपना सीना बिछा रखा है,
उनके चरणों को अपने वक्ष-स्थल पर
धारण करने के लिए !
(ब्रह्माण्ड-मोहिनी – One who enchants the entire Universe.
श्याम रंग – Dark Complexion.मृत्यु-मोक्ष – Death and Liberation.अधिपति – Master/Controller.
वक्ष-स्थल- Chest). 

उस मृगनयनी की काली-सी गोद में
सहस्र सूर्य-चंद्र-ग्रह-सितारे
शिशु बन के झूलते रहते हैं।
(मृगनयनी – One who has eyes like a deer.सहस्र- Thousand.शिशु- Baby).

ऊपर बिछा
पिघले नीलम-सा
अंतहीन आकाश,
एक झलक ही तो है
उसके स्निग्ध लावण्य का!
(पिघले नीलम-सा – Like a molten sapphire.अंतहीन- Limitless.स्निग्ध- Quiet/Soothing.लावण्य – Beauty).

बावरी है वो!
निश्छल मन की मल्लिका !
उसके श्याम गालों में
हर दिन की शाम ढलती है।
(बावरी- Crazy.निश्छल- Innocent.मल्लिका- Empress.श्याम गालों- Dark cheeks).

नाचती रहती है वो हर सांझ
मरते दिन की चिता के ऊपर!
(सांझ – Evening.चिता- Pyre).

बेबाक! बिखरे बालों के घने वन से
फिर धरती के वजूद पर
आहिस्ता-आहिस्ता रात चढ़ती है।
(बेबाक – Fearless.बिखरे बाल- Messy hair.घने वन- Dense forest.वजूद- Identity/Existence.आहिस्ता- Slowly/Gradually).

सागर के क्षितिज पर
हर शाम डूबता सूरज
उसके माथे पर बिखरी
सिन्दूरी छटा की आभा ही तो है !
(सागर- Sea.क्षितिज- Zenith/Horizon.माथा- Forehead.सिन्दूरी- The colour or vermillion.आभा- Aura).

ये सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड असक्षम है
उसकी खूबसूरती को धारण कर पाने में
बस इसलिए मेरी माँ दिगंबर हो गयीं।
(सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड – Entire Universe.असक्षम धारण कर पाने में- Incapable of Containing.दिगंबर- Without any clothes (and limits!)).

प्रकृति बन बिछ गयी हर कतरे पर।
विभु से अणु में समा गयी।
(विभु- Mighty/Manifested/Macrocosm.अणु- Molecules/Unmanifested/Microcosm).

प्रकृति सहज है।
उसपर कोई आवरण नहीं होता!
(सहज- Simple/Raw.आवरण- Cover, anything that veils (and limits!)).

असंख्य माणिकों का तेज
खुद में धारण करने वाली
(असंख्य माणिकों – Uncountable rubies).

और

असंख्य भुवनों को
अपने उस तेज के अंश मात्र से
प्रकाशित करने वाली वो महामाया…

हाँ ! उसका रंग ज़रा काला है|
(भुवनों- Universes and Multiverses.अंश मात्र- Just through a part of Her Divine splendour.प्रकाशित- Lighten up)

#काजी नज़रुल इस्लाम जी की एक कविता/गीत से प्रेरित। 
#मूलप्रकृति आदिशक्ति के काली रूप को समर्पित।
# गुरुदेव के श्री-चरणों में अर्पित। 

माँ 3
Om Shree Matre Namah!
Loads of Love, Peace and Devi Maa ka Dulaar to you all!!

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Snigdha

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