जैसे एक बच्चा नौ महीने अपने मां के गर्भ में रहता है। अपनी मां से ही पोषण प्राप्त करता है। मां के ही संस्कार उस पर पड़ते है। वह अपने मां से ही बनता है। मां से ही उसको जीवन मिलता है।

मुझे भी नौ महीने plus हो गया है मेरे स्वामी के छाया में रहते। इस पथ मे  मैं अपने आप को एक नवजात शिशु की भांति महसूस कर रही ।जिसका भोजन सिर्फ और सिर्फ अपनी मां के शब्द रहे। उनकी जीवन ही उनकी सीख है। सुबह से शाम , शाम से रात, रात से सुबह केवल और केवल उनको ही पढ़ना ,उनको ही सुनना जिसका एकमात्र काम रहा। जो मुझे दिन रात पोषित करती रही अपने शब्दों से,अपने ज्ञान से,अपने सरलता से,अपनी करुणा से,अपने प्रेम से ,अपनी संस्कारो से।

आज मुझे उनमें मां दिखाई दे रही है।🥰🥰❤️

ना जाने ये भाव आज ही क्यों आया मेरे दिमाग में,मुझे नहीं पता।

मुझे हमेशा अटपटा लगता था जब उनके लिए कोई मां शब्द प्रयोग करता। मुझे लगता देवी मां के लिए होगा। लेकिन आज बात समझ आ रही है।

वो मां भी है,पिता भी है।

वो गुरु भी है,वो सखा भी है।

वो भाई भी है,और भगवान भी।

O my mother, my divine mother.

Please keep me always close to you .I am ignorant. I am fool. I am lazy too. But I am only yours,your little girl❤️. By having you I have found my whole world,which is full of your divinity💕💕 and love. My immense gratitude to you for everything,for everything. And please take care of yourself🙏💕.

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Your smile is my world ❤️.

O my holiest mother❤️

O my moon faced mother❤️

Thank you so much for everything.

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏😊😊🥰

Swami❤️🙏.

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Abha

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