सबसे पहले तो पोस्ट पढ़ने वाले दोस्तों से मेरा प्रश्न है की चित्र में लगी हुई  मेरे हाथ में जिस पौधे की पत्ती है  उसे पहचाने और बताएं कि यह किस पेड़ की पत्तियां हैं, इसका आकार ऐसा क्यों होता है ,और यह किस क्षेत्र में पाई जाती है? फिर आगे हम अपनी बात शुरू करते हैं।

       हमने कई बार सुना है और पढ़ा भी है पहला सुख निरोगी काया को माना गया है ,अर्थात अगर हमारा शरीर स्वस्थ है तो हम हर प्रकार के सुखों का उपभोग कर सकते हैं इसके विपरित अगर शरीर ही तकलीफ में है, बीमार ग्रस्त है तो हमारे पास भले ही सुख की ढेर सारी सामग्री रखे हैं हम उसका उपभोग नहीं कर सकते ।ऐसे मैंने सैकड़ों उदाहरण अपने आंखों से भी देखें हैं। जिसके भी संपर्क में रहता हूं कम से कम उसे इतना जरूर बताता हूं कि हमारा शरीर लंबे समय तक क्रियाशील, ऊर्जावान और स्वस्थ कैसे रह जा सकता है। प्रभु की कृपा से मेरा स्वास्थ्य बहुत अच्छा है और इसे सुदृढ़ रखने के कुछ उपाय हमेशा में करते रहता हूं ।पहली बात तो यह कि मेरा सिद्धांत है । Prevention is better than cure मतलब आप समझ गए होंगे। मेरी आयुर्वेद में सहज ही रुचि है। इसलिए मैं दूर-दूर से आयुर्वेद की प्रमाणित पुस्तकें मंगवा करके हमेशा से पढ़ता आया हूं और कोशिश करता हूं कि उसमें लिखे हुए नियम का पालन करूं। आयुर्वेद की महानतम पुस्तकों में भावप्रकाश निघंटू ,अष्टांग हृदयम, सुश्रुत संहिता ,वाग्भट संहिता, धनवंतरी संहिता, चरक संहिता इन सब ग्रंथों के नाम आते हैं ।हमारा जो एलोपैथिक मेडिकल साइंस है इसका इतिहास 100 वर्ष से अधिक पुराना नहीं है ऑपरेशन तो तब से शुरू हुई जब 1945 में सेकंड वर्ल्ड वॉर समाप्त हुआ, जबकि आयुर्वेद ऋषि मुनियों के द्वारा प्रतिपादित की गई ऐसी पद्धति है जिसमें शल्य चिकित्सा यानी ऑपरेशन के 100 से अधिक तरीके बताए गए हैं और सारे के सारे प्रमाणिक हैं.। उतने प्रमाणिक तरीकों को आज का मेडिकल साइंस इतना डिवेलप होने के बावजूद भी फॉलो नहीं कर सकता ।जब पूरी दुनिया में शिक्षा का कहीं कोई केंद्र नहीं था तब हमारे यहां तक्षशिला विश्वविद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय हुआ करते थे और वहां इन समस्त प्रकार की विद्याओं का ज्ञान संपूर्ण विश्व को दिया जाता था ।तो निश्चित रूप से हमें अपने शिक्षा पद्धति और आयुर्वेद पर गर्व है इसलिए मैं पूरे मन से आयुर्वेद पढ़ता हूं।

  • अब दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि हमें रोग का कैसे निदान करना है इस बात की जानकारी कम है लेकिन रोग हो ही नहीं , इसके लिए कैसी जीवन चर्या होनी चाहिए यह बात मुझे अच्छी तरह से पता है। आयुर्वेद बिल्कुल ही निरापद और हानि रहित चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद में कुछ ऐसी औषधियां भी हैं जो हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है अगर उनका प्रयोग किया जाए तो चंद मिनटों में गंभीर से गंभीर बीमारियों का नाश कर सकती है ।आवला एक ऐसी औषधि है जिसे शाकीय भारतीय डॉक्टर कहा जाता है। अगर इसका सेवन प्रतिदिन किया जाए किसी भी रूप में तो यह हमेशा हमें युवा ऊर्जावान बनाने के साथ-साथ शरीर की सारी मशीनरी को स्वस्थ और सुदृढ़ बनाए रखता है, मांस पेशियों में लचीलापन रखता है और रक्त नालियों में सुचारू रूप से रक्त प्रवाह होते रहता है। आंवला में एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में बहुत मददगार साबित होते हैं ।यह शरीर से सारे टॉक्सिंस को निकाल कर बाहर कर देता है और हम अधिक समय तक युवा बने रहते हैं। अभी बहुत सी बातें लिखनी है आयुर्वेद के जो कुछ नियम मैंने अपने ऊपर अप्लाई किए वह अगले दिन लिखूंगा फिलहाल इतना बता देना चाहता हूं कि दुनिया की कोई भी चिकित्सा पद्धति इतनी निरापद और हानि रहित नहीं है जितनी आयुर्वेद । योग औरआयुर्वेद का अपने आप में गहरा संबंध है । आंवला और अश्वगंधा इन दो चीजों को मैं बहुत पहले से सेवन करता आ रहा हूं और इसके बदौलत हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी विकसित हो गई है की किसी भी तरह का रोग हमारे शरीर पर हावी नहीं हो पाता है। वास्तव में हमारे वातावरण में विभिन्न प्रकार के रोगों के कीटाणु तैरते रहते हैं और सब के ऊपर वह अप्लाई होता है लेकिन हानि सिर्फ उसी को कर पाता है जिस की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो ।इसके विपरीत जिस की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है उस पर वह कोई खास असर नहीं दिखा पाता चाहे वह कोविड का प्रकोप ही क्यों ना हो।अगले दिन में अपनी दिनचर्या के बारे में बताऊंगा क्योंकि आहार के साथ अगर विहार यानी हर फिजिकल एक्टिविटी का एक फिक्स टाइम हो ।वह अगर सही कर लिया जाए तो हम किसी भी प्रकार के रोग से ग्रसित नहीं हो सकते हमारा नाम कभी बीमार लोगों की लिस्ट में नहीं आ सकता। उदाहरण देकर समझा रहा हूं जैसे किसी सर पर से वाटर लीकेज हो रहा है और हम लगातार पोछा लगा रहे हैं तो फर्श कभी सूख पाएगा?…  शायद नहीं अगर हम लीकेज को बंद कर देंगे और फिर पोछा लगाएंगे तो फर्श अपने आप में तुरंत सूख जाएगा। हमारी दिनचर्या हमारे लिए वास्तव में इतना ही महत्व रखती है कि हम शुद्ध और सही वक्त पर भोजन करें और इसके साथ ही हमारे खाने की टहलने की सोने की या अन्य कार्य को करने की एक सही रूटीन हो तो उसे विहार कहा जाता है ।अगर ऐसा हो तो हम पानी के लीक होने का रास्ता बंद कर चुके होते हैं और अब फर्श सूखने में देर नहीं लगेगी मतलब हमारा स्वास्थ्य ठीक हो जाएगा ।इसके विपरीत हम परहेज ना करें हम लीक होने वाले छेद को बंद ना करें और सिर्फ चाहैं कि दवाइयों के बदौलत हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहे तो कभी ऐसा संभव नहीं है ।वह दिनचर्या अगले दिन बताऊंगा आज इतना ही ,राधे राधे🙏🙏🙏os.me के सभी सदस्यों को प्रणाम

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Ashu Harivanshi

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