सुनो रोहित आज आप गुड़िया को संभालो, मैं फटाफट खाना बना लेती हूं, जैसे ही रोहित से मैंने कहा, रोहित ने दुखी स्वर में कहा मुझे आज ऑफिस जाना है ।

अरे ऐसे कैसे आपको ऑफिस जाना है मैंने हफ़्ते भर पहले कहा था आपसे कि हमें आज गुड़िया के वैक्सीनेशन के लिए जाना है और इतनी दूर अकेले कैसे जाऊंगी अब मैं?

मैं जानता हूं मुश्किल होगा तुम्हारे लिए, पर मेरी भी मजबूरी है| मैंने छुट्टी ली थी पर सुबह ही मेल आया कि कुछ बहुत जरूरी काम से छुट्टी कैंसिल कर दी है, कहते हुए रोहित ऑफिस जाने की तैयारी करने लगे।

मैं अब और नाराज हो गई ये क्या तरीका है रोहित आपके ऑफिस वाले ऐसा कैसे कर सकते हैं, उन्हें पता है तीन महीने कि छोटी बच्ची है हमारी, फिर भी छुट्टी कैंसिल कर दी शायद इंसानियत नहीं बची अब दुनिया मैं बिल्कुल भी।

बस करो अब, अगर जरूरी काम नहीं होता मैं नहीं जाता पर ऑफिस भी जरूरी है मेरे लिए कहते हुए रोहित ऑफिस निकल गए।

मैंने फटाफट काम वाली दीदी से काम कराया और तैयार होने लगी| गुड़िया के वैक्सीनेशन का चार्ट निकाल रही थी कि घर की घंटी बज गई| अरे सुनीता दीदी अभी काम कर के गई, क्या हुआ फिर आ गई| सुनीता हमारी काम वाली दीदी हैं।

सुनीता ने मेरे हांथ में बच्चों का कैप दिया, दीदी ये लो बाहर बहुत गर्मी है और गुड़िया को ऐसे बाहर बिना कैप के ले जाना ठीक नहीं आप जानती हो मुंबई कि गरमी वो भी मई महीने की, ये लो दीदी पहना कर ले जाना बाहर लू चल रही है। दीदी अगर और घर नहीं होते, मैं ही साथ चलती आपके, कहते हुए सुनीता चली गई लेकिन मैं बस यही सोचती रही कि सुनीता कितनी अच्छी है।

मैंने कैब बुक की, गुड़िया को लिया, और उसका समान का बैग, और चली गई अस्पताल। काफी देर बाद डॉक्टर का नंबर आया| बच्ची को टीका लगवाया, और घर जाने के लिए वापिस जैसे ही कैब बुक करने लगी, एक घंटे तक कोई कैब नहीं मिली।

बच्ची तो टीका लगा था, थोड़ा परेशान थी| बच्ची स्तनपान करती थी तो मैं जल्दी थक जाती थी, लेकिन हिम्मत करके हॉस्पिटल की सीढ़ी से नीचे उतरी और दूर दूर तक कोई ऑटो नहीं था। बहुत गर्म हवा चल रही थी, मैंने हिम्मत करके बच्ची को कैप और अपने दुपट्टे से ढंक दिया और पैदल चलने लगी| थोड़ी देर में मेरी हिम्मत भी जवाब देने लगी| दो-तीन ऑटो निकले, आवाज दी, कोई रुका नहीं| अब मेरा मन भर चुका था, और इतने में मेरे सामने से एक ऑटो निकला मैं चाह कर भी आवाज ना दे पाई|

लेकिन थोड़ा आगे जाकर ही वो ऑटो पलट कर आने लगा और मेरे पास रुका, मैडम बैठो कहां जाना है आपको मैं घर तक छोड़ देता हूं? मैंने भगवान का नाम लिया और बैठ गई| भैया, मुझे त्रिशूल अपार्टमेंट जाना है। ऑटो वाले ने मुझे मेरे घर के रास्ते ले जाना शुरू कर दिया| तभी मैंने पूछा भैया आप पलट कर कैसे आए, मैडम जैसे ही आगे बढ़ा आपके हांथ में बच्चा दिखा और इतनी गरमी में आप बच्चे को लेकर पैदल चल रही थी इसलिए मैं लौट आया और मैं तो घर जा रहा था खाना खाने, लेकिन जब आपको देखा बच्चे के साथ तो सोचा पहले आपको आपके घर पहुंचा दूं फिर अपने घर जाऊंगा।

मेरी आंखों में आसूं आ गए और थोड़ी देर में मेरा घर भी। मीटर का बिल देखकर मैंने ज्यादा पैसे देने चाहे पर ऑटो वाले भैया ने साफ मना कर दिया| जब मैंने कहा भैया मैं आपको खाना लाकर देती हूं, तब ऑटो वाले भैया ने हंसते हुए कहा, नहीं दीदी मेरी बीवी भी भूखी होगी मेरे संग ही खाना खाती है अच्छा अब चलता हूं।

मैं तो घर आ गई लेकिन एक बात मुझे समझ आ गई की सुबह ही मैंने अपने पति से कहा था कि इंसानियत ही नहीं लोगों में वो गलत था आज ही भगवान ने मुझे दिखा दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

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Divya Dubey

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