प्रणाम स्वामीजी 🙇🙏 ,

मुझे प्रसिद्ध संत सूरदास जीं की अनमोल पंक्तिया याद आ रहि है जो अपने भगवान से कह रहे है , जिस प्रकार पारस पत्थर भेदभाव को त्यागकर पवित्र और अपवित्र – दोनों लोहों को अपने संसर्ग से सच्चा सोना बना देता है , जिस प्रकार गंगा नदी किसी दूसरी नदी और नाले के जल को अपने जल में मिलाकर अपने जल जैसा ही बना लेती है तथा जैसे आवरणों के मिट जाने पर जीव और ब्रह्म भी निर्मल – निर्विकार परमात्मा ही हो जाते हैं , उसी प्रकार आप मेरे दोषों पर ध्यान न देकर मुझे अपने ही समान बना लीजिए । हे प्रभूजी ! इस बार मुझे संसार – समुद्र के पार कर दीजिये ; आप अपने स्वभाव या अपनी प्रतिज्ञा से विचलित नहीं होइए ।

मेरे मन में भी आप के लिए यहि भाव आ रहे है स्वामीजी 🙇🙏

स्वामीजी मेरे अवगुण चित ना धरो,
समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,
चाहो तो पार करो ।

हे स्वामीजी ! आप मेरे अवगुणों को चित्त में नहीं रखिए । आपका नाम समदर्शी है अर्थात् आप अच्छे – बुरे दोनों के प्रति समान भाव रखनेवाले कहलाते हैं । इसलिए आप अपने स्वभाव के अनुकूल ही मेरे प्रति भी व्यवहार कीजिए ॥१ ॥

एक लोहा पूजा मे राखत,
एक घर बधिक परो ।
सो दुविधा पारस नहीं देखत,
कंचन करत खरो ॥
स्वामीजी मोरे अवगुण चित ना धरो..

एक लोहा मूर्ति के रूप में पूजा – घर में रखा जाता है और दूसरा लोहा पशुओं का वध किये जानेवाले हथियार के रूप में वधिक के में रहता है । पवित्र और अपवित्र इन दोनों प्रकार के लोहों के प्रति पारस पत्थर कोई भेद भाव नहीं रखता , दोनों को अपने संस्पर्श से वह सच्चा सोना ही बना देता है ॥२ ॥

एक नदिया एक नाल कहावत,
मैलो नीर भरो ।
जब मिलिके दोऊ एक बरन भये,
सुरसरी नाम परो ॥
स्वामीजी मोरे अवगुण चित ना धरो..

एक नदी होती है , जिसमें शुद्ध जल बहता रहता है । दूसरा नाला होता है , जिसमें अपवित्र जल प्रवाहित होता रहता है । दोनों ( नदी और नाले ) का जल गंगा नदी में मिलकर उसी के जल का रूप ले लेता है , तब वह भी गंगाजल ही कहलाने लगता है ॥३॥

एक माया एक ब्रह्म कहावत,
सुर श्याम झगरो ।
अब की बेर मुझे पार उतारो,
नही पन जात तरो ॥
स्वामीजी मोरे अवगुण चित ना धरो..

शरीर में स्थित परमात्मा का एक अंश जीव कहलाता है और प्रकृति मंडल में स्थित दूसरा अंश ब्रह्म । आवरण भेद से दोनों अंशों के नामों में अंतर है ; परन्तु आवरणों के मिट जाने पर जीव और ब्रह्म भी निर्मल – निर्विकार परमात्मा ही कहलाने लगते हैं ।

All glories to you my lord 🙇🙏🌺🌺

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Amruta

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