आजकल की ठंड और बरसात के मौसम ने मुझे ईश्वरी कृपा का एक बार और एहसास कराया।
कैसे…..?
बताती हूँ ……..।।
आश्रम में आने से पहले अपने घर की रसोई में काम करते हुए ठंडे पानी से सर्दी -जुकाम ,बुखार व शारीरिक दर्द  बढ़ जाते थे। परंतु इन समस्याओं का मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।क्योकि घर के काम तो करने ही थे। वही विज्ञापन याद आता है…….गोली खाओ , काम पर चलो।
आश्रम में आने के बाद मेरे भगवान ने मुझे दोनों विकल्प
(दो रसोईघर) दिए हैं।
आज आश्रम की पाकशाला में बनी गरमागरम वेजिटेबल सेवइयों का कॉफी के साथ आनंद लेते हुए (अपने कमरे में) । हृदय की गहराइयों से यही शब्द निकल रहे थे …धन्यवाद मेरे प्यारे भगवान धन्यवाद …वाह 😍आपकी लीला भी न्यारी है।😍।

आप भी अजीब बैंक के स्वामी हो ,मेरे जैसे खोटे सिक्के को भी बहुत हिफाज़त से रखते हो।

हम गृहणियों के लिए तो यह सपना ही होता है कि कोई सुबह गरम-गरम नाश्ता बनाकर उनके सामने परोसेगा।घर गृहस्थी का ख्याल रखते हुए वह सपने में भी कभी यह सपना नहीं देखती। क्योंकि परिवार की पसंद -नापसंद और सुख-सुविधाओं का ख्याल रखते हुए स्वयं की इच्छाएं और सुख दुख का एहसास ही समाप्त हो जाता है,और वह गरम भोजन का स्वाद ही भूल जाती है।
अब ऐसा नहीं है ।☺☺
वैसे मैं प्रतिदिन अब भी कुछ ना कुछ बनाती हूँ परंतु….अपने आदत और शौक के कारण😊😊
श्री हरि भगवान का धन्यवाद करने के अतिरिक्त मेरे पास और कोई शब्द ही नहीं है। धन्यवाद श्री हरि भगवान धन्यवाद😍
जो मांगे ठाकुर अपने ते ,बिन मांगे ही देवें।
                    ।।जय श्री हरि ।।