मैंने पूछा, भगवान,
तूने दिया ही क्या है?
उसने कहा –
तूने मांगा तो बहुत था,
पर चाहा क्या था?

राह तुम्हारी थी
चले भी तुम थे
विकल्प भी तुम्हारे थे
निर्णय भी तुम्हारा था
प्रारंभ भी तुम्हारा था
तो अंत भी
तुम्हारा ही तो होगा

मैंने तुम्हें अपना अक्स दिया
मोहलत दी
ताकत दी

परिणाम पर पहुँच कर
निष्कर्ष तो मत थोपो।

आगे और जाना है,
सुधर जाना
परिणाम बदल जाएंगे

निश्चिंत रहो
मैं बोल रहा हूँ।।

मेरा कथ्य 

अपने अनुभव से मैं यह कह सकता हूँ, जीवन में तात्कालिक तौर पर बहुत विचार प्रकट हुए। पर, जीवन उसी ओर चला, जिधर अंतर्मन की भावनाएं लेकर चली। भावनाओं से साथ चलने वाले मिले। गहराई में उतरते उतरते लक्ष्य भी बदलता गया। एक लक्ष्य मिलते ही दूसरा सामने दिखा। रास्ता बढ़ता गया। यात्रा जारी रही।  

  • हम जब दिल से चाहते हैं, रास्ते खुद ब खुद बनते जाते हैं। 
  • पूजा से प्रेरणा मिलती है। आगे बढ़ने का उत्साह मिलता है। 
  • उत्तम अनुभव होते है। 
  • हमारे कर्मों और परिणाम के लिए भगवान उत्तरदायी नहीं है।