नमस्ते फैमिली🙏

मैं सिक्कों में बिकना चाहता हूँ

मैं सिक्कों में बिकना चाहता हूँ,
ताकि बच्चे भी खरीद सकें,
और पा सकें वृद्ध भी,
बिना नुकसान के डर के,
ले सकें मेरे मन को,
तपते सूरज की धूप जैसे,
अपने शरीर पर ऊर्जा की तरह,
ले सकें मेरे मन को,
राधाकृष्ण के महारास की,
उस शीतल पूर्णिमा की तरह।
मैं समेटकर उन सिक्कों को,
फिर उन गरीब बच्चों को दूंगा,
कि फिर खरीद सकें वे मुझे,
और फिर दें सकूँ उनके मन को,
वही ऊर्जा और शीतलता,
किसी परिष्कृत रूप में।
मैं सिक्कों में बिकना चाहता हूँ

tic tac toe

चार लकीरें,
और, खेल तैयार।
दो खिलाड़ी,
और, खेल शुरु,
दो हारे हुए चिह्न,
कुछ चालें,
और, खेल समाप्त।

दोस्ती

उसने उससे दोस्ती तोड़ दी है,
अब क्या बताऊं कि,
किसने किससे दोस्ती तोड़ दी है।

फूलों से भँवरे रूठे हैं,
भँवरों के बहाने कई गज के हैं,
कहते हैं कि फूल कागज के हैं।

भगवान से विज्ञान नाराज है,
चूँकि भगवान ने कहा था, सिर्फ ‘मैं’ हूँ,
ना कोई सवाल है, ना राज है।

….Some thoughts more….😅

आये तुम यदि

प्रभु आये तुम यदि
इस ह्रदय मंदिर में
तन मन हर्षित मेरा होगा ही

धारणा, विचारों कर्मों से
बँधा हुआ अब भी हूँ
है यह बोध हमारे मिलन में
समय का घेरा होगा ही

चलता रहता हूँ तुम्हारी ओर
यह आस लिये कि
अंधकार छिटक-छिटक जाएगा
और एक दिन सवेरा होगा ही।

अंत तक साथ आने के लिये शुक्रिया 🙏😊

For the image Thanks to Mathieu Stern on Unsplash

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Amit

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