Dear all,

Jai Shri Hari🙏

First of all, thank you very much for giving your precious time for reading. On 5 April 2021, i was very stressed due to many reasons but then suddenly with Swamiji Grace, i freed myself from everything for few hours like a bird 🐦 and felt something different . Tried to write those feelings in a poem. I hope all of you will enjoy.

आज कुछ पल के लिए ही पर खुद को आज़ाद कर के देखा,

हर चीज से ,रिश्ते से और खुद मे ही विलीन होने का सुख देखा ,

उस कुछ पल में जैसे खुद को पा लेने की अनुभूति या सब कुछ खो देने की; 

पर यह जो भी था बहुत सुखद था !

उस पल के प्रति पल मे आन्ददित महसूस किया ,

जैसे की न तो कुछ खोना था, न पाना बस जीना ही तो था !

उस प्रति पल में ईश्वरत्व का एहसास हुआ, 

 मानो वो कह रहे हो के  मैं तो कभी दूर ही नहीं था बस तुमने ही कभी समय न निकाला; 

आज जब जी कर देखा तो वह कुछ पल मानो एक लम्बी यात्रा जो अगम्य है 

हर उस पल को जीने की इच्छा इतनी प्रबलित थी की मानो शरीर का हर रोम उसे महसूस कर रहा था 

आज कुछ पल के लिए ही सही पर खुद को आज़ाद कर के देखा और सब कुछ पा लिया या खो दिया; 

पर यह जो भी था बहुत ही सुखद था, 

उस हर पल में खुद को बारम्बार देखा, जाना , समझा और महसूस किया ,

और वो एहसास जिसे शब्दों में न समझाया जा सके 

पर हाँ यह जो भी था , बहुत ही सुखद था 

उस कुछ पल में खुद को आज़ाद कर दिया हर करम से और हर रिश्ते से और उसी में ही सब कुछ पा लिया या खो दिया ..

पर यह जो भी था बहुत सुखद था. 

काश !

काश , होते कुछ शब्द तो समझा पाती के  यह कैसा एहसास है 

काश , होते कुछ शब्द तो समझा पाती के यह कैसा एहसास है !

पर क्या करूँ ,” स्वामीजी ” शब्दों में नहीं पिरो सकती इस सुखद एहसास को ,

हाँ ! पर यह जो भी है बहुत ही ख़ास है! 

कर लें अगर आज़ाद हम खुदको हर उस पल से और जाने , समझे ,

तो शायद समझ आएगा की ना तो कुछ खोना है, ना ही पाना है 

बस जीना ही तो है, 

तो सोचो, क्या यहाँ जीना इतना मुश्किल है ?

इसका जवाब …..

हाँ या ना ?

यह तो सिर्फ हमारे ऊपर ही निर्भर करता है ..

धन्यवाद् !

Thank you so much Swamiji for everything 🙏❤️🙏