मैं ने कई जगह पढ़ रखा था कि जन्म से 12 साल तक के बच्चों में जिस तरह के संस्कार डाले जाते हैं वैसा उसके मन मस्तिष्क पर पूरे जीवन प्रभाव रहता है। मेरे पापा हर रोज मुझे रात में जब पढ़ाते तो पढ़ाने के बाद हम हम लोगों को देश भक्ति से संबंधित गीत गा कर सुनाते और साथ ही मुझे भी गाने  के लिए कहते। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके द्वारा जोश भरे देश भक्ति गीतों का हम दोनों भाई पर क्या असर पड़ा ।मैं भले ही सरकारी सेवा में ऑफिसर नहीं बन सका लेकिन उस संस्कार की बदौलत थोड़ी बहुत देशभक्ति तो हमसे जरूर आ गई।  हां छोटा भाई आर्मी में चला गया उसके ऊपर देशभक्ति का तमगा लग गया पर मेरी देशभक्ति मैंने छुपा कर के रखी क्योंकि कैमरे के सामने आकर कुछ करना मुझे पाखंड लगता है।

एक बार कॉलेज में 26 जनवरी के उत्सव की तैयारी हो रही थी। मुझे ड्रामा में भी और सिंगिंग कंपटीशन में भी पार्टिसिपेट करने के लिए तैयार रहने को कहा गया था ।हमने लगभग अच्छी तरह से अपनी सारी तैयारियां कर ली थी और आज 26 जनवरी का दिन आ गया। मैं घर से यह सोचकर निकला चलो आज तो बहुत बेहतर परफॉर्मेंस करनी है ।सो  थोड़ा पहले टाउनशिप झंडोत्तोलन का कार्यक्रम देख लेते हैं फिर कॉलेज चले जाना है ।

                   जब आधे रास्ते में पहुंचा तो देखा कि एक बहुत बड़ी बिल्डिंग थी जिसके निचले तले में भयंकर आग लगी हुई थी। चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। उसमें बहुत सारे उलेन के कपड़े और रॉ मैटेरियल्स रखे हुए थे। कुछ लोग fire brigade वालों को लगातार फोन पर फोन किए जा रहे थे ताकि वह दमकल लेकर आए। कुछ लोग दुर्घटना से घायल हुए परिवार वालों को सांत्वना दे रहे थे ।कोई जोर जोर से चिल्ला रहा था कि अरे ऊपर वाले कमरे में मेरे दादाजी हैं अब वह शायद जल जाएंगे ।कुछ क्षण मैं रुका और विचार किया कि आज 26 जनवरी है और मुझे अपने कॉलेज में अपना परफॉर्मेंस दिखाना है, वहां पर मुझे तालियां मिलेंगे ,प्रोफेसर के ब्लेसिंग्स मिलेंगे चीफ गेस्ट के हाथों से प्राइज मिलेंगी ,प्रिंसिपल का विशेष प्यार मिलेगा ।पर यहां भी तो देशभक्ति दिखाई जा सकती है वहां स्टेज पर देशभक्ति दिखाना और यहां वास्तव में देशभक्ति दिखाना दोनों में से क्या चयन किया जाए………… कुछ देर सोचने के बाद मुझे लगा कि वास्तव में मेरे देशभक्ति की सर्वाधिक आवश्यकता इस जगह है ।शरीर तो मेरा फिट है झट से मैं किसी तरह दीवार वगैरह फांद कर सेकंड मंजिल पर चला गया। और एक वृद्ध जो किसी तरह से नीचे उतरने के लिए छटपटा रहे थे और बेहद ही डरे हुए थे घबराहट के मारे उनका सर भी थोड़ा फूट चुका था हालांकि उन्हें आग से कोई दिक्कत नहीं हुई थी पर कुछ देर अगर और वहां रहते हैं तो हो सकता था कि  गैस का विस्फोट हो सकता था। मैंने और 2 अन्य लड़कों ने मिलकर के उन्हें किसी तरह से बाहर निकाला ।सभी लोग उन्हें देखकर बेहद खुश हुए ।बच्चों को मेरे आने से पहले ही सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था और आग इतनी तीव्र गति से फैल रही थी कि कोई भी इतनी हिम्मत नहीं कर रहा था कि घर जाकर कोई सामान निकाल कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला जाए। वह बहुत से लोग थे जो पीड़ित परिवार की स्त्रियों को सांत्वना दे रहे थे क्योंकि संवेदनशील तो ऐसे ही होते हैं। पर मुझे सांत्वना देना तो नहीं आता था मैं इस दीवार से उस दीवार पर दौड़कर जाता और कभी कभी तो मेरे पैर में भी गहरी खरोच आ जाती और रक्त निकलने लगते ।लेकिन फिर भी जितना बन सकता था बाल्टी में पानी भर भर के उस कमरे तक जाता जहां भयंकर आग लगी हुई थी ।खुद को आग से बचाते हुए और कमरे में जितना पानी भेज सकता था बाल्टी के माध्यम से और ट्यूब के माध्यम से डाला ।मेरे साथ दो तीन युवक और थे बाकी लोग चाहकर भी कोई मदद नहीं कर सकते थे क्योंकि जिस जगह से उस कमरे में पानी डालना था वह जगह  खड़ी दीवार थी जिस पर बैलेंस बनाकर चल पाना सबके लिए संभव नहीं था ।एक मन कह रहा था कि काश अभी तुम कॉलेज में होते तो कितना मस्ती करते तुम्हें सब कितना प्यार करते फिर दूसरा मन कहता है कि इससे बड़ी देशभक्ति और क्या हो सकती है प्रैक्टिकल देशभक्ति यही है चलो यही करो। लगभग 1 घंटे तक बहुत कोशिश की गई आग बहुत फैल सकती थी लेकिन उसे कुछ हद तक नियंत्रित किया गया पर पूरी तरह से नियंत्रित नहीं हो सका ।क्योंकि हमारे पास साधन नहीं थे और दमकल वाले बेचारे परेड में चले गए थे वह आ नहीं रहे थे लगभग 1 घंटे के बाद दमकल आए। लेकिन तब तक आग पूरी तरह से ऊपरी मंजिल में भी फैल चुकी थी। मैंने सोचा कि 1 घंटे बाद भी जब मौका मिला है तो पुलिस वालों का साथ देना चाहिए। मैंने फिर से दमकल वाले की पानी की पाइप ली और सबसे खतरनाक मोड़ों पर खड़े होकर के जितना हो सका पानी की बौछार लगा दी मेरे साथ दो चार अन्य लड़के भी जुड़ गए और उनसे गहरी दोस्ती भी हो गई। इस काम में लगभग डेढ़ घंटे लगे और आग पर नियंत्रण पा लिया गया ।बाद में और भी दो चार दमकल वाले आ गए लेकिन तब तक स्थितियां कंट्रोल में आ गई थी ।अब मैंने सोचा कि इतने पुलिस वाले आ गए इतने दमकल आ गए चलो अब कॉलेज चलते हैं।

मैं जब कॉलेज गया तो देखा कि डेढ़ घंटे जो लेट हुई थी मुझे ,वास्तव में डेढ़ घंटे बाद वहां का प्रोग्राम स्टार्ट ही हुआ था। मतलब यह की इधर का लेट होना मुझे उधर के कार्यक्रम के लेट होने की शुरुआत से मैनेज हो गई ।वहां मैंने पूरी तरह से ड्रामा में भी अपनी भागीदारी निभाई और कुछ प्रोफेसर्स के रिक्वेस्ट पर मैंने अपनी 2 पसंदीदा सोंग्स भी परफॉर्म किया ।मुझे principal Shri Tapan Kumar shandilya ने सबके सामने स्पेशली बुलाकर के शाबाशी दी ।हालांकि पिछले डेढ़ घंटे में जो घटना घटी थी उसका जिक्र मैंने वहां किसी के सामने नहीं किया क्योंकि यह मुझे अच्छा भी नहीं लगता था। पर एक बात की मुझे बहुत खुशी हुई कि दोनों प्रकार की देशभक्ति मेरी काम कर गई। एक वहां आग लगे हुए बिल्डिंग को बुझाने में प्रैक्टिकल देशभक्ति और दूसरा कॉलेज में स्टेज पर । उस दिन मुझे अपने आप पर बहुत गर्व महसूस हो रहा था कि मेरे पिता जी ने मेरे अंदर जो देश भक्ति का भाव जागृत बचपन से किया था ,वह बेहद ही अच्छा था अगले दिन कि जब न्यूज़पेपर पढ़ी तो बेगूसराय के न्यूज़पेपर वाले पेज में सबसे ऊपरी हेडलाइंस में लिखा था कि ,,,,, कोलेजिएट school gate की buipding पर आग लगी और पुलिस वाले ने तुरंत जाकर आग पर काबू पा ली 😀😀 इस बात को लिखते समय मुझे अक्षय कुमार की हॉलीडे पिक्चर की याद आ गई ।खासकर वह सीन विश्व में फौजी अक्षय किसी टेरेरिस्ट को पकड़ता है लेकिन इसका सारा क्रेडिट स्थानीय पुलिस वालों को मिल जाता है। सोचा इतने दिनों के बाद इस प्लेटफार्म पर इस घटना को शेयर करता हूं

             और अंत में इस प्लेटफार्म के सभी सदस्यों को मेरा प्रणाम और साथ में यह शुभकामना कि सभी स्वस्थ रहें और प्रसन्नता से युक्त रहें,,,, क्योंकि जीवन बहुत छोटा है अगर हम स्वस्थ और प्रसन्न नहीं रहेंगे तो हमारी जिंदगी बोझ बनती चली जाएगी। बस जीवन जीने की कला सीखनी है थैंक यू सो मच जय श्री हरि 🌴🌴🌱🌱🌿🌻🌿🌿🌼🌼🌾🌾🥀🥀🌲🌹🌹💐💐

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Ashu Harivanshi

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