92 वर्ष की लंबी आयु और इसके बावजूद चेहरे पर तेजस्विता ,शरीर में कार्य करने की अद्भुत शक्ति, ऊपरी आवास स्थान से 50 फुट नीचे गंगा के किनारे सीढ़ियों से उतरना और सीढ़ियों से फिर ऊपर अपने आवास तक जाना और दिन भर में कई बार इस क्रिया को दोहराना ,इसके साथ ही आश्रम के कई सारे क्रियाकलापों में शारीरिक रूप से सहयोग करना यह उस सन्यासी की दिनचर्या में शामिल था ।अपने शरीर की हर जरूरतों को खुद से पूरा करना और इसके साथ ही घंटों बैठकर रामायण का पाठ करना ।मुझे आश्चर्य होता था की इस उम्र में तो ज्यादातर लोग जीवित बचते ही नहीं है ।इतनी लंबी आयु लिए भी नहीं पाते और यह सन्यासी बाबा इस उम्र में भी इतना सक्रिय कैसे हैं।

     जी हां ,जब मैं ऋषिकेश में राम झूला से होते हुए गंगा लाइन वाले रास्ते पर भागीरथी धाम आश्रम गया तो वहां एक ऐसे ही अद्भुत सन्यासी को देखा जो हर रोज 2:30 बजे ही जग जाते हैं ।और कितने भी भयानक ठंड हो स्नान करके सुबह 6:00 बजे तक कमर सीधी करके बैठते हैं और अपनी साधना संपन्न करते हैं ।ऊपर जो मैंने सारी क्रियाकलाप बताई वह भी उनकी हर रोज की दिनचर्या में शामिल है ।कहीं ना कहीं उनका प्रकृति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही उनके इस उम्र में भी सक्रिय होने का राज है ।       मेरे पिताजी भी लगभग पूरी जिंदगी इतने ही सक्रिय रहे उन्हें हमने कभी किसी डॉक्टर के यहां लाइन लगाते हुए नहीं देखा था। वह हमेशा प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में 4:00 बजे से पहले ही जग जाते थे ।तो कहीं ना कहीं मैंने व्यक्तिगत जीवन में भी ऐसे बहुत सारे उदाहरण देखें कि व्यक्ति अगर ब्रह्म मुहूर्त में जगता है ,गलत खानपान से बचता है ,प्रकृति के नियम के अनुसार चलता है और शारीरिक रूप से क्रियाशील रहता है तो निश्चित रूप से उसका स्वास्थ्य बेहतर होता है।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मेरा घर पूरे मोहल्ले में एकमात्र ऐसा घर है जहां चाय पीने का रिवाज बिल्कुल नहीं है ।अगर कोई आ जाए तो उसे अवश्य पिला दिया जाता है पर पीने की प्रथा वहां है ही नहीं ।कोई नहीं पीता मेरे घर में चाय जबकि भारत विश्व में सबसे बड़ा चाय का उपभोक्ता और दूसरे नंबर पर चाय का उत्पादक राष्ट्र माना जाता है। हमारे देश में पहले चाय का प्रचलन नहीं था 1600 ईस्वी में जब अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आए तो अंग्रेजों ने सबसे पहले फ्री में भारतीयों को चाय पिलाना शुरू किया ।उसके बाद जब भारतीयों को चाय की आदत लग गई तो उन्होंने अधिक महंगे दामों पर चाय की बिक्री शुरू कर दी। कुछ लोग दिन भर में इतना चाय पी जाते हैं कि उन्हें भोजन करने की आवश्यकता ही महसूस नहीं होती ।उन्हें लगता है सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है पर नहीं उस भूख को मारकर आप अपने लिए बहुत बड़ा नुकसान क्रिएट कर रहे हो। हमने देखा है कि जिन्हें बेड टी की आदत लग जाती है उन्हें जब तक चाय ना मिले तब तक वह बाथरूम ही नहीं जाते हैं। चाय पीने की जो वास्तविक पद्धति है वह है स्टीम पॉट सिस्टम, अगर स्टीम पॉट सिस्टम के माध्यम से हम चाय पीते हैं तो चाय हमें उतनी आनी नहीं करती जितने की कड़क चाय पीने से हानि होती है।

क्या है स्टीम पॉट सिस्टम* 

जब चाय को हम 100 डिग्री से अधिक ताप पर बहुत देर तक उबालते हैं तो चाय में मौजूद टैनिन नाम का एक टॉक्सिन चाय से रिलीज होना शुरू कर देता है और धीरे-धीरे यह टॉक्सिन हमारे ब्लड में मिलता है जो कैंसर का कारण बनता है। अगर हम अधिक मात्रा में और खूब उबाल उबाल कर कड़क चाय पीने की आदत रखते हैं तो निश्चित रूप से यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहता है। इस बात को अन्यथा ना लें अगर चाय पीने की स्टीम पॉट सिस्टम हम अपना लें तो यह चाय हमें हनी नहीं पहुंचा सकती। इस सिस्टम के तहत पहले पानी को 100 डिग्री तक उबाला जाता है उबालने के बाद उसमें चाय पत्ती और चीनी डालकर के उसे एयर टाइट करके ढक दिया जाता है कुछ देर लगने के बाद उसे छानकर गरम गरम पी ली जाती है। मतलब इसमें बार-बार उबालना आवश्यक नहीं रहता है इस तरह से अगर हम इस सिस्टम के अनुसार चाय पीते हैं तो उसमें चाय का टॉक्सिन जिसे टैनिंग कहते हैं वह रिलीज नहीं हो पाता और हमारे स्वास्थ्य के लिए वह किसी भी रुप में नुकसानदायक नहीं होता ।जैसे शहद को अगर हम नार्मल टेंपरेचर में रखते हैं तो हमें हानि नहीं करता लेकिन जैसे ही हम उसे आग पर गर्म करते हैं तो उसमें मौजूद फार्मिक एसिड जो मधुमक्खी के डंक से आया होता है वह एक विष के रूप में रिलीज होना शुरु करता है और ब्लड में मिलने से हमें एक स्लो प्वाइजन की तरह हानि पहुंचाता है ।तो यह था वह तरीका जिस तरीके से चाय पीने पर वह हमें हानि नहीं पहुंचा सकती। अगर आपको अच्छा लगे तो एक दो बार ट्राई करके देखना। वैसे कड़क चाय के जितनी टेस्टी यह चाय तो नहीं लगेगी पर कड़क चाय जितनी हानि पहुंचाती है उतनी हानि यह बिल्कुल नहीं पहुंचाएगी क्योंकि इसमें उस चाय के विषाक्त एलिमेंट रिलीज हो ही नहीं पाए। स्वस्थ रहिए और प्रसन्न रहिए इसी के साथ जय श्री हरि। 🌴🌴💐💐🌹🌲🥀🌾🌿🌿🌼🌼🌻🌻🌱🌱🌳🌳🌴

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Ashu Harivanshi

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