कितना कुछ है, 

जो मैं कर नहीं सकता।  

 

बिन करवट के सो नहीं सकता,

आँखें मीजे बिन सो नहीं सकता।

बिन गुरु ताल सिख नहीं सकता,

जिव्हा बिन सत्य बोल नहीं सकता। 

 

कितना कुछ हैं, 

जो मैं कर नहीं सकता।  

 

लगे चिरकाल से हूँ अटका पड़ा,

ना इधर का हुआ, ना उधर निकल पड़ा। 

देख उसे मैं अपनी भौं चढ़ा पड़ा,

के इधर-उधर से कहीं आगे वो निकल पड़ा। 

और मैं, बस यहीं निहारता खड़ा। 

 

सब आँखें गुर्दे हुए बेकार,

जब छीने उसने हमारे दिन चार। 

निहत्ता कर किया ऐसा वार,

की नष्ट हो गया जीवन का सार।  

 

और इसी को हम केहते, विक्लांग विचार। 

 

“The world isn’t just the way it is. It is how we understand it, no? And in understanding something, we bring something to it, no?
Doesn’t that make life a story?”

Yann Martel, Life of Pi 

 

“Simple can be harder than complex: You have to work hard to get your thinking clean to make it simple. But it’s worth it in the end because once you get there, you can move mountains.”

– Steve Jobs

 

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Vishwas Dubey

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