“जाने क्यों वो हंसी आज भी भूल नहीं पाती हूं मैं, जाने क्यों वो मुस्कान से बढ़कर कुछ समझ नहीं पाती हूं मैं, कई दिनों बाद तू मुस्कराया था याद है मुझे एक दर्द में तू उस दिन खिलखिलाया था”।

जनवरी की ठंड थी रात के ढाई बजे थे। जब मेरे लाल ने रात में अजीब से आवाजें निकालना शुरू किया था और वो आवाज़ रात के साथ- साथ बढ़ती जा रही थी और कभी वो मेरे पास तो कभी अपने पापा के पास बिस्तर में लुढ़क रहा था। 

मैंने और उसके पापा ने तुरन्त ही समझ लिया कि कुछ तो  गड़बड़ है और तुरन्त हमने रात में ही कार निकाली और घर के पास के ही अस्पताल में अपने बच्चे को लेकर गए ।
जाते ही डॉक्टर ने कुछ मशीन लगाई और आपस में कुछ बात करने लगे ,उनकी बातों में चेहरे मैं परेशानी साफ नजर आ रही थी। मैं तो खुद को संभाल ही नहीं पा रही थी बस एक ही सवाल भगवान क्यों ?
क्यों हो रहा है ये सब हमारे साथ?
थोड़ा समझ आता है मुझे भी डॉक्टर की भाषा इतना समझ चुकी थी कि ऑक्सीजन लेवल बहुत कम हो गया है और मेरी जान जो अभी साल भर का है अच्छे से सांस नहीं ले पा रहा है और तभी डॉक्टर ने मुझे और उसके पापा को बुलाया और तब तक सुबह के ४ बजे गए थे और बतलाया कि सांस नली में कुछ दिक्कत है । शायद एक ऑपरेशन करना होगा लेकिन ये सब हम तभी बता पाएंगे आपको ,जब हम बच्चे को ऑपरेशन थिएटर के अंदर ले जाएंगे और उसके बाद शायद वेंटिलेटर पर भी रखना होगा।
शब्द ही ऐसे थे कोई भी हो कांप जाएगा और फिर मैं तो मां थी ,उस दिन मानो ऐसा लगा ये धरती फट जाए और मैं समा जाऊं बस मुझे ये सब ना सुनना है ना देखना है।

“जिन्दगी आसान नहीं होती” अक्सर पापा से सुना है बेटा हर चीज का सामना करना होता है, हर हाल में जीना होता है।
बस भगवान से प्रार्थना करते हुए मैं ऑपरेशन थियेटर के बाहर बैठी थी। याद है डॉक्टर ने मेरी जान की टीशर्ट लाकर दी कि ये रख लीजिए शायद मशीन के कारण उसकी टी शर्ट उतार नहीं पाए थे तो कैंची से काट दी थी। उस टी शर्ट को अपने सीने से लगाए बैठी थी और आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। काफी देर मैं और उसके पापा ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठे रहे लेकिन सिर्फ खामोशी थी वहां और आंसू।

बच्चे को कुछ मशीनें लगाई गई थीं और तकरीबन १० दिन तक बेहोश रखा गया था या नींद के इंजेक्शन से सुलाया हुआ था।
आईसीयू में दस दिन काटे,मशीन की आवाज डॉक्टर की बातें जिन्दगी क्या दिखा रही थी नहीं जानती लेकिन बहुत कठिन दिन थे।
आज दस दिन बाद जब डॉक्टर ने बतलाया कि आज बच्चे को होश आएगा शायद आपको नहीं पहचाने पर आप घबराना मत धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा।
फिर एक परीक्षा की घड़ी सामने थी और बड़ी हिम्मत करके हम उसके सामने खड़े हुए यहां से वहां चलने लगे अगर पहचान गया होगा तो सर हिलाकर देखेगा की हम कहां जा रहे हैं। भगवान पर विश्वास था और भगवान ने विश्वास टूटने नहीं दिया और मेरे बेटे ने हमें देखा हमें तसल्ली हुई की पहचान गया है।

कुछ दिन तक सिर्फ रोता रहता था। उसको सुकून सिर्फ मां की गोद या स्तनपान से ही आता था। डरा हुआ सहमा हुआ से रहता था।आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट हुआ पर हंसता नहीं था बस रोता ही रहता था। मानो कहता हो मां घर ले चल अब ये नहीं देखा जाता मां क्या हो रहा है ये और कौन लोग हैं ये।
१५ दिन से उपर हो गए थे और वो हंसा नहीं था लेकिन मैं अक्सर मोबाइल में कुछ ऐसा दिखाती थी कि वो खुश हो जाए पर कोई चीज उसे हंसा नहीं पा रही थी।
जाने कितनी रात हम सोए नहीं थे  लेकिन जब एक झपकी लगती यही नजर आता कि वो हंस देगा आज तो मुस्कुराएगा।
आज  वो सपना पूरा हुआ मैं मां हूं ना हार थोड़ी मानने वाली थी । आज सुबह जब मैं और मेरा बेटा बिस्तर पर बैठे थे और एक कार्टून जो डांस कर रहे थे उन्हें देखकर मैंने भी वही करना शुरू किया और अचानक उसने मेरी ओर देखा और थोड़ा सा मुस्कुरा दिया ।मैंने और मजेदार डांस किया और वो जोर से हंसा खिलखिलाया,उसकी हंसी ने मुझे जो खुशी दी वो मैं शब्दों में नहीं समझा पाऊंगी लेकिन जब वो हंस रहा था मैं फूट फूट कर रो रही थी।
आज जब मन दुखी होता है परेशान होता है बस वही एक किलकारी है जो याद आते ही मैं हर ग़म भूल जाती हूं। जिन्दगी मैं हार नहीं मानना है कभी इतना सिखा दिया जिन्दगी ने।
भगवान कभी किसी मां को ऐसे दिन ना दिखाए यही प्रार्थना करती हूं।

एक मां की आपबीती

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Divya Dubey

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