बस 25 मार्च की बात है।रोजाना की तरह शाम होते ही मै हिमालय की खूबसरत वादियों को देखने निकल पड़ा।संध्या का समय था।पर्वतों के पेड़ो पर शाम की धुंधली सी स्वर्णिम आभा पड़ रही थी ।जंगल से आ रही पक्षियों का कलरव सुन रहा था।कुछ जानवर भी अजीब आवाजें कर रहे थे।सामने विशाल खड़ा हिमालय अपनी अडिगता का परिचय दे रहा था।नीचे गहरी खाई मे बहती हुई गंगा नदी जीवन का संगीत सुना रही थी।बड़े करीब से प्रकृति की शोभा निहार रहा था मै तभी उस सुनसान से सड़क पर कोई युवा अघोड़ी सन्यासी मुझे आता हुआ दिख पड़ा।
मैंने अघोडियो के बारे मे तरह तरह की बातें सुन रखी थी।जाने क्यों आज इस हमउम्र युवा संन्यासी को देखकर कुछ बात करने की इच्छा हुई जो अपनी ही धुन में अकेले कहीं को जाता हुआ दिखा।हमने उन्हें पूछ लिया बाबा किधर जा रहे हो,उसने दुखी होकर बताया कि किसी ने मुझे जानबूझकर गलत राह भटका दिया मैं नीलकंठ महादेव के पास मनिकुट पर्वत पर जाना चाहता था।बहुत भटका हूं अब सही राह पता चला है।उसकी आंखों में कुछ कुछ इष्ट प्रेम,कुछ विवशता,कुछ दुनिया के द्वारा सताए जाने का भाव स्पष्ट नजर आ रहा था।हमने कहा बाबा आपका लक्ष्य तो अभी करीब तीस किलोमीटर दूर है कैसे जाओगे,,,,,,उसने कहा महादेव से बहुत प्यार करता हूं उनके लिए प्राण दे सकता हूं और इतना कहते कहते उनकी आंखे भींग गई प्रेमाश्रु से।फिर तीसरा प्रश्न किया मैंने कि बाबा भूख लगेगी तो क्या करोगे,,,,,,,जानते हो क्या कहा उन्होंने,,,,,,बोला भूख लगेगी तो पेड़ के पत्ते नोचकर खा लूंगा पर अपने महादेव के पास पहुंच कर ही दम लूंगा,,,,उसके इस ईष्ट प्रेम को देखकर मै अभिभूत हो गया और उनके चरण स्पर्श कर लिए।
अब मैंने सोचा कि मैं कैसा हूं जो कहता हूं कि श्री कृष्ण का भक्त हूं और सुविधाएं चाहता हूं।वो कितना महान प्रेमी है अपने शिव का कि उनके लिए पत्ते खा सकता है और प्राण भी दे सकता है।मुझे अपने तुच्छ होने का भान हुआ। दोस्तों कभी किसी साधु या सन्यासी के बाहरी वेश भूषा को देखकर उसके व्यक्तित्व का आंकलन मत करना।ये भारत भूमि है यहां एक से एक भगवद भक्त मिलते हैं जो अन्यत्र किसी देश में नहीं मिलते।कुछ लोग मजाक उड़ाते हैं साधु संत का।अरे आप एक दिन अपने परिवार,घर,मित्र रिश्तों के बिना,पैसे के बिना रह नहीं सकते और उन्होंने अपना घर जमीन पैसा रिश्तेदार सब कुछ प्रभू को पाने के लिए छोड़ दिया।अगर हम उनकी कोई सहायता न कर सकें तो उनका मजाक तो न उड़ाए ।साधु भारत का गहना है।भारत की विशिष्ट पहचान इन्हीं भगवद भक्तों से है।वो भी चाहते तो कमा खा कर जीवन बिता सकते थे पर उनकी भींगी हुई आंखें इन बातों की गवाही दे रही थी कि सबसे बड़ी दौलत पाने के लिए उसने सबसे बड़ी चीज दाव पर लगा दी। हम किसी के अतः करण को नहीं जानते कि कौन किस कोटि का प्रेमी भक्त है।अतः हम उनका सम्मान करें क्युकी धर्म की रक्षा से ही हमारी रक्षा हो पाएगी।राधे राधे

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Ashu Harivanshi

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