नवरात्रा बीत चुकी थी, मां के नौ रूपों की उपासना सम्पन्न हो चुकी थी। मै बाजार से निकल रहा था।अचानक हमें किसी खास दुकान पर भीड़ नजर आईं और कुछ शोरगुल भी।ध्यान से देखा तो ये मांस की दुकान थी।लोग मुर्गे और बकरे का मांस खरीदने की मारा मारी कर रहे थे । अफरा तफरी मची हुई थी।इतना महत्वपर्ण चीज कहीं खरीदने से चूक न जाए इस बात की हड़बड़ी दिख रही थी।हमने कौतूहल से एक आदमी को पूछा क्या कारण है इस हलचल का तो उसने बताया ,,”नवरात्रि बीत चुकी है आज अब जमकर खाऊंगा”
उसके उत्तर सुनकर मेरा चिंतन प्रधान मन विचारों मे डूब गया।क्या जगज्जननी मां की उपासना करने वाले भी ऐसे होते हैं।नौ दिन दुर्गा और आज मुर्गा….. आखिर मानसिक स्तर से चिंतन किसका हो रहा था इसी बात का ना कि जल्दी से नवरात्रि बीत जाएं और हम…..समझ रहे हो न।ये स्वाद कैसी चीज है जो किसी की मौत से भी समझौता कर लेती है।वो मां है वो सबकी मां है वो कैसे किसी बकरे या भैंसे की बलि मांग सकती है।कैसे किसी की मूक चीख से प्रसन्न हो सकती है। वो हर जीव की मां है उस जीव की भी जिसकी आप बलि दे देते हो।सच कहूं तो मनुष्य अपनी वासना के लिए धर्म के स्वरूप को विकृत कर रहा है।हमने देखा है कि मजहब विशेष के लोग करोड़ों की संख्या में बकरे,गाय, ऊंट जैसे जानवरों को बेरहमी से तड़पा तड़पा कर कतल करते हैं और अल्लाह की रहमत पाने का दम भरते हैं।क्या अल्लाह की इबादत का यही तरीका है।शायद नहीं,लोग कहते हैं कि किसी का दिल मत दिखाओ और वही व्यक्ति अपने प्रोटीन , राइबोफ्लेविन,और फॉलिक एसिड की कमी की पूर्ति किसी को मार कर पूरी कर रहा है।
कभी सोचो कि जो व्यवहार आप दूसरों के साथ करते हो वही अगर आपके और आपके प्रियजनों के साथ कोई करें तो कैसा लगे।शायद हृदय कांप जाएगा सोचकर ही।हमने एक से पूछा क्यू खाते हो मांस तो बताया कि गुरुवार को नहीं खाते हैं हम।बहुत भक्त आदमी हूं।फिर पूछा कि किस ग्रंथ में पढ़े हो कि गुरुवार के अलावा बाकी दिन आप पाप कर सकते हो,,अब कुछ नहीं बोला।
हमें पता है कि तर्क प्रधान लोगो की कमी नहीं है।वो अपनी बुद्धिमत्ता के माध्यम से अपने कृत्य को सही ठहरा सकते हैं पर गीता नायक श्री कृष्ण का उद्घोष याद रखा जाय,”अवश्यमेव भोक्तव्यम कृतम कर्म शुभा शुभम”कर्म का फल तो अवश्य भोगना पड़ता है।आज कोरोंना के डर से सब परेशान हैं।सबको मालूम है कोई भी घटना प्रकृति मे यूं ही नहीं घटती।मनुष्यो के ही दोहन का दुष्प्रभाव होता है। आज इसी अध्यात्म प्रधान देश में लाखों कत्लखाने खुल चुके हैं।इसे मॉडर्न सोसायटी की प्रगति मानी जाती है।पर उन लाखों पशुओं की मूक चीखें वातावरण में तैरते रहती हैं।उनका प्रभाव पड़ना ही है।जिस ईश्वर ने हमें बनाया उसी ने उसे भी बनाया जिसे मारकर हम अपने स्वाद की पुष्टि करते हैं।अगर हम धर्म के विरुद्ध चलेंगे तो हमें उसका कोप भाजन बनना पड़ेगा।महापुरुषों ने कहा है कि हम सिर्फ कर्म करने में स्वतंत्र हैं फल भोगने में नहीं।जानता हूं मेरे शब्द में कुछ तीखापन और कड़वाहट है पर भावनाओं में …….????????अपना ख्याल रखिए।दिन रात न्यूज चैनल पर मत रहिए क्यू कि एक ही नकारात्मक खबर बार बार देखने और सुनने से हमारे मस्तिष्क और शरीर पर उसका नकारात्मक असर पड़ता है।बेफिक्र होकर जीवन जीना है।जो होना होगा प्रभू की मर्जी से होगा।कोई भी महामारी हमारे गोविंद से बढ़कर नहीं। जय श्री हरि🙏🙏🌿🌿🌻🌻🌳🌴

Pay Anything You Like

Ashu Harivanshi

Avatar of ashu harivanshi
$

Total Amount: $0.00