सर्वात्मका, शिवसुंदरा स्वीकार या अभिवादना
तिमिरातूनी तेजाकडे प्रभू आमुच्या ने जीवना ॥

सुमनांत तू, गगनांत तू
तार्‍यांमध्ये फुलतोस तू
सद्धर्म जे जगतामध्ये
सर्वांत त्या वसतोस तू
चोहीकडे रूपे तुझी जाणीव ही माझ्या मना ॥

श्रमतोस तू शेतामध्ये
तू राबसी श्रमिकांसवे
जे रंजले अन गांजले
पुसतोस त्यांची आसवे
स्वार्थावीना सेवा जिथे तेथे तुझे पद पावना ॥

न्यायार्थ जे लढती रणी
तलवार तू त्यांच्या करी
ध्येयार्थ जे तमी चालती
तू दीप त्यांच्या अंतरी
ज्ञानार्थ जे तपती मुनी होतोस त्यांची साधना ॥

करुणाकरा करुणा तुझी
असता मला भय कोठले?
मार्गावरी पुढती सदा
पाहीन मी तव पाउले
सृजनत्व या हृदयामध्ये नित जागवी भीतीविना ॥

– कुसुमाग्रज

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प्रणाम प्रिय स्वामीजी 🙇🙏 ,

हे सर्वात्मका, शिवसुंदर स्वामीजी क्रिपया मेरा प्रणाम स्वीकार करे । आप हमारे जीवन को अंधेरे से प्रकाश की ओर लेकर चलिए ।

फुलों में , गगन के तारो में आप कि हि हंसी खिलती है ।
जग में जो सद्धर्म है , उन सब में आप हि हो । चारों ओर आपका रूप है ।

आप श्रमिकों के लिए प्रेरणा है । जो दुखी जीव है , उनका सहारा है । जहां स्वार्थ के बिना सेवा है वहां आपका पावन पद है ।

जो न्याय के लिए लढ़ रहे है आप उनके साथ है । ध्येय के साथ जो अंधेरे में चल रहे है , आप उनके के लिए दिपक हो । ऋषी मुनीं कि आप साधना हो ।

आपकी करूणा होते हुए मुझे भय किसका ? मार्ग पर बढते रहकर आपके चरणों का मुझे हमेशा चिंतन है । मेरे ह्रदय में आपसे सृजनत्व है जो मुझे मार्गदर्शन करता है ।

All glories to you my lord 🙇🙏🌺🌺

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Amruta

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