कभी हिलाती, कभी डुलाती, लहराती , कभी पेड़ों में छलांग लगाती कभी अचानक से भूमि में पसरी धूल को आसमान में उड़ाती है। कभी मेरे कानो में फुसफुसाहट करती हुई दूर जाकर  खिलखिलाकर हंसती है। ये हवा मुझसे लुका-छिपी का खेल कर रही है । सामने मैदान में बिछी दूब की नरम सेज मुझे अपने स्पर्श पाश में ऐसे बांध  रही है जैसे कोई अप्सरा किसी गंधर्व को रिझाती हुई अपने मोह पाश में बांधती हो।दोपहर की मीठी धूप मुझे अपने नन्हे शिशु की भांति सेंक कर मेरी आवभगत कर रही है।

सूरज आज से पहले इतना नरम कभी नहीं था। आज इसकी तपिश में एक स्वाद है एक ख़ुशबू है जो इसकी तीखी किरणों में भी लावण्य भर रही है। मेरे आस-पास वृद्ध आम ,बरगद, पलाश, के वृक्ष हैं और कई जिनके मुझे नाम तक नही पता परन्तु इनके आभामण्डल को देख कर ऐसा लगता है जैसे मैं अपने घर के बड़े वयोवृद्ध स्वजनों के बीच बैठा हूँ। जहां मुझे लाड़-प्यार किया जा रहा है, मेरी एक तोतली हंसी सुनने की कीमत में न जाने कितनी कहानियां परोसी जा रहीं है। कुछ छोटे पेड़ भी हैं ,नौजवान, तने हुए इनकी शाखाओं में बल दिखता है। जो ज्यादा मोटी तो नही है पर इनकी जवानी की अकड़ हवाओं के साथ उनके चल रहे संवाद से साफ-साफ सुना जा सकता है। 

दूर तक फैला विशाल मैदान जिसका  अदृश्य छोर मन मे कौतूहल पैदा करता है। हवा और धूल इनमे खेलती हुई उन छोरों तक जाती है और वही गुम हो जाती हैं। ये सारा दृश्य मेरे सामने हो रहा है , जितना आनंद मुझे ये देखने मे हो रहा है शायद लिखने में थोड़ा कम ही व्यक्त कर पाऊँ। मैं अकेले ही बैठा इस दिव्य आयोजन का दर्शक हूँ। दूर तक कोई रिहायशी इलाका नहीं है। मात्र प्रकृति माँ और उसके नन्हे बालक इस क्रीड़ा में सहभागी हैं।

मैंने अपने साथियों से कहा चलो ज़रा जंगल की सैर कर आये ,कुछ क्षण बैठे माँ की गोद मे, जवाब आया ,”अमा सूनसाने में क्या रस मिलता है तुमको ,गज़ब आफत हो यार😊।सूनसान में इतना भी अकेलापन नहीं बल्कि, एकांत में जो मधुर संवाद होता है वो शायद लोगों के साथ होने में नही।मैने कहा, कोई बात नही मैं अपने सहचर ,अपने बान्धवों को सूनसान में ही ढूंढ लूंगा। यहां बैठे घंटो बीत गए ,ऐसा लग रहा है जैसे मैं देर से पहुँचा हूँ। यहां तो अनहद नाद कब से शुरू है और आज से नही शायद तब से जब से प्रकृत ने अपना सौंदर्य वरण किया। सच्चे आनंद के खोजी भँवरें यही अपनी प्यास बुझाते आये हैं। जो ‘सत,चित, आनंद,’ के प्यासे है उन्हें “सूनसान के सहचर” ही रास आते हैं।

Thanks for reading 😊

Jay shri hari🌼🌼🌼💐💐🙏🙏

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Satyam Tiwari

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