आश्रम से दिल्ली के सफर में (30 जनवरी) हमें( कालका )श्वेता जी ने अत्यधिक आग्रह व प्रेम से सुबह नाश्ते का निमंत्रण दिया।वाह…पालकपूरी- सब्जी, हलवा व सैंडविच ।
सैंडविच अत्यधिक स्वादिष्ट होने के कारण मैं प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकी। उन्होंने बहुत प्रेम व अपनेपन से नाश्ता कराया व रास्ते के लिए भी सैंडविच ले जाने का आग्रह किया ।हम ने मना कर दिया क्योंकि हमें दोपहर के भोजन के लिए कहीं रुकना ही था ।इसलिए सैंडविच उपयोग में नहीं आते|
लगभग 2:00 बजे रेस्टोरेंट सड़क की दूसरी तरफ होने के कारण हमने किसी अच्छे ढाबे में रुकना उचित समझा। परंतु सभी जगह भीड़ होने के कारण हमें कहीं भी रुकने का स्थान नहीं मिला। अब 3:00 बज चुके थे और भूख भी लग रही थी।
उस समय भोजन इसलिए भी आवश्यक था क्योंकि सोनीपत के बाद एक नई (EPE) 60 किलोमीटर की सड़क बन जाने के कारण हमें दिल्ली मे प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं थी और घर तक दो घंटे का सफर कम भी हो जाता है।
परन्तु ….यातायात कम होने के कारण अभी उस मार्ग पर एक भी भोजनालय नहीं है ।
भोजन मिलने की संभावना समाप्त होने पर हम विचार कर रहे थे कि क्या किया जाए ।
तभी…. हमें एक बड़ा ढाबा दिखाई दिया।भोजन मिलने की आशा में शरीर में ऊर्जा का संचार हुआ परंतु …..परंतु…. ढाक के वही तीन पात।।😢
अत्यधिक भीड़ होने के कारण हम निराश होकर कार में आकर बैठ गए| तभी.. हमारी नजर श्वेता जी के दिए हुए भूरे रंग के थैले पर पड़ी, कि देखे इसमें क्या है?
पता है..उसमें क्या था… ?सैंडविच… जी हां.. उसमें सैंडविच थे।मैं इतना भावुक हो गई कि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं श्वेता जी को धन्यवाद करूं या मेरे भगवान को?(आप ही निर्णय करें)।
क्योकि उन्होंने हमारे भोजन का प्रबंधन पहले से ही कर रखा था। हमने कार में बैठकर भगवान को धन्यवाद देते हुए सैंडविच खाए और 3:20 पर श्वेता जी को भी धन्यवाद के लिए फोन किया।🍔
यह पोस्ट लिखने का एक ही उद्देश्य है कि हम भगवान की दी हुई सुख-सुविधाओं को अपना अधिकार समझकर छोटा या बड़ा आकंते हैं। परंतु वह हमारा अधिकार नहीं.. श्री हरि भगवान की कृपा है कृपा ।😀
उस दिन एहसास हुआ कि अन्नपूर्णा माँ की हम पर असीम कृपा है जो हमे प्रतिदिन (अपनी पसंद का) भोजन मिल रहा है। अन्न का हमें सम्मान करना चाहिए । 😍
।। श्री हरि भगवान की जय ।।🌹

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Karuna Om

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