एक बार की बात है जब मैं दसवीं क्लास में पढ़ता था, इसी तरह जून के महीने चल रहे थे और मेरा दोस्त मुझे उसके आम के बगीचे में चलने का प्रस्ताव दिया। समीर मेरा दोस्त था और उसके खुद के आम के बगीचे थे जिसमें बहुत ही मीठे और अत्यंत ही स्वादिष्ट पेड़ के पके हुए बहुत सारे आम लगे हुए थे। यद्यपि उसे पता था कि मैं आम के पेड़ पर बहुत आसानी से चढ़ सकता हूं इसलिए उसने इस कार्य के लिए मुझे चुना और हम दोनों मिलकर समीर के आम के बगीचे में गए और  मैं पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ना शुरू कर दिया। उसी जगह एक छोटा सा पोखर भी था जिसमें कई सारी मछलियां रहती थी हम दोनों खेत से छोटे-छोटे मेंढक पकड़ कर रोज उन मछलियों को खिला दिया करते थे। मेंढक पकड़ कर उसके शरीर के आर पार तार से छेद कर उसे माला के जैसा आकार बना देते थे और मेंढक की माला को उन मछलियों के बीच फेंक दिया करते थे और मछलियां उन मेंढक के माला पर टूट पड़ती थीं। सारी मछलियां 2 मिनट में उन सारे मेंढको को खा जाते थे और हमें बड़ा मजा आता था ।शायद उसी का फल भुगतने का आज दिन आ गया था

      जून महीने की आखिरी सप्ताह थी और स्कूल में गर्मी की छुट्टी हो चुकी थी। मैं बगीचे में आ गया था और पेड़ पर चढ़ गया था और पके हुए आम तोड़ तोड़कर नीचे फेंक रहा था ।कुछ समय के बाद जब आम तोड़ चुका तो नीचे उतरा और अब आम को खाने की हमारी इच्छा हुई। चुकी वहां कोई नल इत्यादि की तैयारी नहीं थी। वहां तो एक चापाकल था और उसका हैंडल इतना स्लिपरी था कि क्या बताऊं ।हमने जी भर कर पेड़ के पके हुए आम का स्वाद लिया और अब हाथ धोने की बारी थी। ज्योहि मैं चापाकल पड़ गया और उसके हैंडल पर हाथ दबाया उसका हैंडल बड़े ही जोड़ के साथ झटके से उठा और मेरे होठ से जा टकराया ।चापाकल के उस हैंडल का मेरे होंठ से टकराना था की मेरे 2 दांत हिलने लग गए और मसूड़ों और होंट से खून की धार बह निकली। दर्द इतना तीव्र हुआ कि मैं उसी जगह गिरा हुआ छटपटाने  लगा ।मुंह से लगातार खून निकलता जा रहा था पर बेहोश नहीं हुआ था। शायद मेंढक की हत्याओं का फल मिल चुका था। दर्द तो असह्य हो चुका था। कुछ देर के बाद मेरा दोस्त वहां दौड़कर आया और उसने  पशु के लिए भोजन तैयार करने वाले कच्ची मिट्टी के चूल्हे पर पानी गर्म किया और उससे मेरे होठों की सिकाई की ।थोड़ा बहुत तो राहत मिला लेकिन फिर भी दर्द हद से ज्यादा थी और मैं कोई इंजेक्शन नहीं लेना चाह रहा था। मैं झटपट घर गया और अपने आयुर्वेद के ज्ञान को खुद के ऊपर अप्लाई करना चाहा।

अब मैंने अपने गैस चूल्हे पर पानी और साथ में उसमें थोड़ा नमक डाल दिया,गर्म किया। उस नमक मिले हुए गर्म पानी से अपने होठों और दातों की सिकाई की तो उस भीषण दर्द से हमें राहत मिल गया ।लेकिन जब हमने देखा कि हमारे तो दो दांत हिलने लग गए बहुत डर गया ।क्योंकि सुना था दूसरी बार अगर दांत टूट जाती है तो फिर जीवन में कभी नहीं आती। मुझे लगा कि यह दसवीं क्लास में में बुड्ढे जैसा हो जाऊंगा अब क्या करूं ।तो उस समय मेरा आयुर्वेद का ज्ञान काम आया ।मैंने भोजन तो कुछ नहीं किया क्योंकि मुंह में सूजन आ गया था हॉट सूज गए थे और दर्द अभी भी बचा था ।दांत हिल भी रहा था तो रात में सोते समय हल्दी पाउडर नमक पाउडर और सरसों तेल तीनों आपस में मिलाकर उसे पेस्ट जैसा बना लिया और उसे अपने दांतो पर अच्छी तरह से लेप की तरह चढ़ा दी और चुपचाप सो गया। सुबह उठा तो आश्चर्य की सीमा न रही दांत बहुत हद तक जम चुका था। मैंने उस प्रक्रिया को अब दिन में भी किया और फिर उसी रात में किया। इस तरह से तीन से चार बार करने पर मेरा वह हिलता हुआ दांत पूरी तरह से जम गया और दर्द भी समाप्त हो गया। इस बात का मुझे अनुभव हो चुका था इसलिए बाद में अगर कोई भी दांत दर्द से जुड़ी हुई समस्या में बताता तो मैं झट से उसे यही उपाय बता देता

  1. अब आखरी बात कर रहा हूं अगर आप चाहते हो की आजीवन आपका दांत मजबूत रहे कभी ना टूटे तो आप एक उपाय करो। हफ्ते में कम से कम एक बार रात्रि में सोने से पहले अपने दांत में नमक पाउडर हल्दी पाउडर और सरसों का तेल मिलाकर उसका पेस्ट लगा लिया करो ।हफ्ते में अगर आपने एक बार भी ऐसा कर लिया और इसे लगा कर सो गए तो आपका दांत आजीवन कभी नहीं टूटेगा। आजकल देखता हूं 45 साल के बाद ही लोगों के दांत टूटने लग जाते हैं और चेहरा बड़ा अजीब सा हो जाता है। अगर आप इस गंभीर समस्या से बचना चाहते हो तो इस शानदार टिप्स को जरूर अपनाना ।कितना आसान नुस्खा है कोई खर्चा भी नहीं है और जीवन भर आपका दांत बना हुआ रहेगा कभी टूटना नहीं। इसके कई सारे उदाहरण भी हमारे सामने उपलब्ध हैं उनका जक्र मैं नहीं करना चाहता ।बस आप को टिप्स बता दिया। बेहद आसान है अगर आप इसे अपना सको तो हमें भी बहुत खुशी मिलेगी।
  2. एक बात और बताना चाहूंगा बेहद गर्म या बेहद ठंडी चीज का दांत से स्पर्श मत करवाना क्योंकि इससे धीरे-धीरे हमारे मसूड़े कमजोर पड़ जाते हैं और दांतों पर उसकी पकड़ वैसी नहीं रह पाती जैसे पहले रहती है।
  3. तीसरी चीज इसमें कुछ लोग हो सकते हैं मेरा विरोध कर दें पर मैं तो ठोक कर सच बोलने वाला हूं इसलिए हमें कोई परवाह नहीं ।आप कोलगेट पेप्सोडेंट या क्लोजअप जैसी विदेशी कंपनियों के पेस्ट का उपयोग बिल्कुल ना करें ।जब आप उसने इनग्रेडिएंट्स देखेंगे तो उसमें आपको सोडियम लॉरिल सल्फेट मिलेगा सोडियम लॉरिल सल्फेट वही है जो डिटर्जेंट पाउडर में झाग उत्पन्न करने के लिए मिलाया जाता है ।अगर आप इसका लंबे समय तक उपयोग करते हैं निश्चित रूप से आपके मसूड़े कमजोर हो जाएंगे और समय से पहले दांत गिर जाएगा। मैं विदेशी कंपनियों का दुश्मन नहीं हूं लेकिन सत्य का समर्थक बिल्कुल हूं। या तो आप किसी  देशी कंपनी के टूथपेस्ट उत्पाद को यूज करें, या जिन्हें भी करना है करें पर ध्यान रहे हैं वह आयुर्वेदिक औषधियों से बना हुआ हो ना कि केमिकल्स को डाल कर के आकर्षक पैकेजिंग की गई हो। अगर आप इनके इनग्रेडिएंट्स देखेंगे तो पता चलेगा की बहुत सारी ऐसी केमिकल जिसमें डाले हुए हैं जो हमारे दांतो के लिए हानिकारक है। मैं खुद जिन प्रक्रियाओं का प्रयोग अपने दांत के सुरक्षा के लिए करता हूं उनको लिख दिया और आश्वस्त भी कर देता हूं कि इनसे आपका दांत हमेशा स्वस्थ और मजबूत बना रहेगा। इसे चाहे तो कोई भी आजमा सकता है। आज के लिए इतना ही जय श्री हरि🌳🌳🌴🌴🌹🌹💐💐🌿🌿🌳🌳🌱🌱🥀🥀🌲🌾🌾

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Ashu Harivanshi

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